ईरान ने स्वीकारा : "अमेरिकी हमलों में परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान", तीन मुख्य साइटों पर B-2 बॉम्बर्स से हमला

दि राइजिंग न्यूज | तेहरान/दुबई। 25 जून, 2025 । अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पहली बार ईरान ने खुद स्वीकार किया है कि उसके तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को अमेरिकी हवाई हमलों में गंभीर क्षति हुई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बुधवार को अल जज़ीरा को दिए एक बयान में कहा कि "हमारे परमाणु ठिकानों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा है, इसमें कोई शक नहीं।"

ईरान ने स्वीकारा : "अमेरिकी हमलों में परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान", तीन मुख्य साइटों पर B-2 बॉम्बर्स से हमला
Iran admits: "US attacks cause heavy damage to nuclear sites" three main sites attacked with B-2 bombers

दि राइजिंग न्यूज | तेहरान/दुबई। 25 जून, 2025 ।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पहली बार ईरान ने खुद स्वीकार किया है कि उसके तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को अमेरिकी हवाई हमलों में गंभीर क्षति हुई है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बुधवार को अल जज़ीरा को दिए एक बयान में कहा कि "हमारे परमाणु ठिकानों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा है, इसमें कोई शक नहीं।"

यह बयान उस समय आया है जब पिछले सप्ताह अमेरिकी B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स ने "बंकर बस्टर" बमों से ईरान की संवेदनशील परमाणु साइट्स पर बड़ा हमला किया था।

???? किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
1. नतांज़ परमाणु सुविधा केंद्र
यह ईरान का सबसे महत्वपूर्ण यूरेनियम संवर्धन केंद्र था।

तेहरान से 220 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित, यह ठिकाना भूमिगत सेंट्रीफ्यूज सिस्टम के लिए जाना जाता था।

अमेरिका का दावा है कि इसपर हमला कर उसकी संवर्धन क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है।

2. फोर्दो परमाणु सुविधा केंद्र
रणनीतिक दृष्टि से अति संवेदनशील यह केंद्र तेहरान से 100 किमी दक्षिण-पश्चिम में एक पहाड़ी के नीचे स्थित था।

अमेरिका ने यहां GBU-57A/B 'Massive Ordnance Penetrator' बम का उपयोग किया जो 30,000 पाउंड वजनी होता है और गहराई में जाकर विस्फोट करता है।

इस बम को B-2 स्टील्थ बॉम्बर से गिराया गया।

3. इस्फ़हान परमाणु रिसर्च सेंटर
यह केंद्र तेहरान से 350 किमी दक्षिण-पूर्व में है और इसमें हजारों वैज्ञानिक कार्यरत हैं।

यहां यूरेनियम रूपांतरण संयंत्र (UCF) और तीन चीनी अनुसंधान रिएक्टर भी स्थित हैं।

अमेरिका और इज़रायल दोनों ने इस केंद्र को निशाना बनाया।

❓ क्यों किया गया हमला?
अमेरिका ने यह हमला इसलिए किया क्योंकि उसे आशंका थी कि ईरान हथियार-ग्रेड यूरेनियम के बेहद करीब पहुंच चुका है।
IAEA और सेटेलाइट इंटेलिजेंस से यह संकेत मिले थे कि ईरान की परमाणु गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

???? ईरान की पहली आधिकारिक स्वीकारोक्ति
अब तक ईरान हमलों को खारिज करता रहा था। लेकिन अब विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से नुकसान को स्वीकार कर लिया है।
हालांकि, बघाई ने नुकसान की सटीक जानकारी देने से इनकार कर दिया।

???? क्या होगा असर?
इस हमले से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।

ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

IAEA और UNSC की गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

???????? भारत पर क्या असर?
भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है।

तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

भारत को अब अपनी कूटनीति और ऊर्जा नीति दोनों पर पुनर्विचार करना होगा।