ट्रंप की धमकी खामेनेई के अंतिम संस्कार पर सियासी हलचल
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। ईरानी समाचार माध्यमों ने दावा किया कि अमेरिका के दबाव के कारण कई देशों ने समारोह से दूरी बनाई, जबकि भारत के प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति पर ईरान ने सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया।
दि राइजिंग न्यूज़ | तेहरान | 7 जुलाई 2026
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह ने केवल शोक का वातावरण ही नहीं बनाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। ईरानी समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार समारोह में विभिन्न देशों की भागीदारी को लेकर कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास हुए। इसी बीच भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति पर ईरान ने सार्वजनिक रूप से धन्यवाद व्यक्त करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की सराहना की।
भारत की भागीदारी पर ईरान ने जताया आभार
ईरान में आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर भारत सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कई प्रमुख भारतीय सार्वजनिक हस्तियां भी मौजूद रहीं। ईरानी दूतावास ने सार्वजनिक संदेश जारी कर भारत सरकार और भारतीय जनता के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कहा कि कठिन समय में भारत की उपस्थिति दोनों देशों के पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को दर्शाती है। ईरान ने यह भी कहा कि इस सहयोग और सम्मान को वह लंबे समय तक स्मरण रखेगा।
ईरानी समाचार माध्यमों में अमेरिकी दबाव का दावा
ईरानी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतिम संस्कार समारोह से पहले अमेरिका की ओर से कई देशों से संपर्क किया गया। रिपोर्ट के अनुसार कुछ देशों से समारोह में भाग न लेने का अनुरोध किया गया और कई सरकारों पर कूटनीतिक दबाव बनाए जाने की बात कही गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिका की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है।
कई देशों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
ईरानी रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि अनेक देशों ने अंतिम संस्कार समारोह में अपने प्रतिनिधि नहीं भेजे या सीमित स्तर पर भागीदारी की। रिपोर्ट में संबंधित देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए। इस कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई कि समारोह में विभिन्न देशों की भागीदारी किन कारणों से प्रभावित हुई। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
भारत का प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद
भारत की ओर से भेजे गए प्रतिनिधिमंडल ने ईरान पहुंचकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अतिरिक्त कई भारतीय सार्वजनिक व्यक्तित्व भी समारोह में शामिल हुए। ईरान ने अपने संदेश में कहा कि भारत की भागीदारी दोनों देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास, सहयोग और पारस्परिक सम्मान का प्रतीक है तथा भविष्य में भी यह संबंध और मजबूत होंगे।
अमेरिका की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
ईरानी समाचार माध्यमों में लगाए गए दावों के बावजूद अमेरिकी प्रशासन या विदेश विभाग की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर दोनों देशों की आगामी प्रतिक्रियाओं पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ी चर्चा
खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर सामने आई खबरों ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की राजनीति और अमेरिका-ईरान संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समारोह केवल धार्मिक या सामाजिक महत्व नहीं रखते, बल्कि इनके माध्यम से देशों के कूटनीतिक संबंधों और विदेश नीति के संकेत भी सामने आते हैं।