"परमाणु हथियारों की दौड़! पाकिस्तान का खतरनाक प्लान"
दि राइजिंग न्यूज। वाशिंगटन/नई दिल्ली। 25 मई, 2025 । अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की नवीनतम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अपनी परमाणु हथियार प्रणाली का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान भारत को अपने अस्तित्व के लिए एक प्राथमिक खतरे के रूप में देखता है और भारत की पारंपरिक सैन्य क्षमता की बराबरी करने के लिए अपने न्यूक्लियर आर्सेनल को तकनीकी रूप से उन्नत बना रहा है। रिपोर्ट में क्षेत्रीय अस्थिरता और भविष्य में सीमा पर बढ़ते तनाव की आशंका भी जताई गई है।
दि राइजिंग न्यूज। वाशिंगटन/नई दिल्ली। 25 मई, 2025 ।
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की नवीनतम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अपनी परमाणु हथियार प्रणाली का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान भारत को अपने अस्तित्व के लिए एक प्राथमिक खतरे के रूप में देखता है और भारत की पारंपरिक सैन्य क्षमता की बराबरी करने के लिए अपने न्यूक्लियर आर्सेनल को तकनीकी रूप से उन्नत बना रहा है। रिपोर्ट में क्षेत्रीय अस्थिरता और भविष्य में सीमा पर बढ़ते तनाव की आशंका भी जताई गई है।
भारत को लेकर पाकिस्तान की नीति और चीन का समर्थन
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की रणनीति में भारत के साथ सीमावर्ती झड़पें, कश्मीर पर आक्रामक रुख और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है। पाकिस्तान को इस नीति में चीन और तुर्की जैसे देशों का परोक्ष समर्थन प्राप्त है। चीन न केवल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में निवेश कर रहा है, बल्कि सैन्य क्षेत्र में भी हथियार, तकनीक और संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से उसकी मदद कर रहा है।
2024 में चीन के निवेश से चल रहे CPEC (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) प्रोजेक्ट के तहत कार्यरत सात चीनी नागरिकों की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा, लेकिन रणनीतिक साझेदारी पर इसका कोई दीर्घकालिक असर नहीं पड़ा।
परमाणु सुरक्षा और विदेशी तकनीक पर फोकस
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान अपने न्यूक्लियर कमांड की सुरक्षा को पुख्ता कर रहा है और "Weapons of Mass Destruction" (WMD) प्रोग्राम के लिए विदेशी तकनीकी सहयोग प्राप्त कर रहा है। इसमें चीन के अलावा हांगकांग, सिंगापुर, तुर्की और UAE जैसे देश शामिल हैं जो उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराते हैं।
भारत की रणनीतिक प्राथमिकताएं और ‘मेक इन इंडिया’ का योगदान
भारत ने पिछले वर्षों की तुलना में रूस से सैन्य खरीद को घटाया है, लेकिन अब भी रूस पर स्पेयर पार्ट्स के लिए निर्भरता बनी हुई है। मोदी सरकार के तहत भारत की रक्षा नीति अब वैश्विक सैन्य नेतृत्व, चीन से मुकाबला और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर केंद्रित है।
भारत ने हाल में अग्नि-I प्राइम MRBM और अग्नि-V MIRV मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इसके अलावा दूसरी परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी को भी भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है जिससे भारत की न्यूक्लियर ट्रायड (थल, जल और वायु आधारित परमाणु क्षमता) और मज़बूत हुई है।
हिंद-प्रशांत में भारत की सैन्य भागीदारी
रिपोर्ट में भारत द्वारा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा साझेदारियों को मज़बूत करने के प्रयासों का भी ज़िक्र है। भारत, क्वाड, BRICS, SCO और ASEAN जैसे मंचों पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अक्टूबर 2024 में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों से सेना वापसी को लेकर समझौता किया था, जिससे सीमावर्ती तनाव में कुछ कमी आई है।