बैलेट पेपर पर पहले ही लगा था टिक!:शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- मेरा पहला वोट किसी और ने डाल दिया था,काशी में बटुकों ने किया स्वागत
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने गाय को राष्ट्र माता घोषित कराने की मुहिम को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए काशी में रणनीति तैयार की जाएगी। शंकराचार्य ने कहा सत्ताधारी पार्टी अगर ऐलान कर दे कि गाय को राष्ट्र माता घोषित किया जाता है तो हमें किसी के पास जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता पक्ष ऐसा नहीं करता है तो विपक्ष में जो लोग हैं, वे अपना शपथ पत्र लेकर उनके पास आएं और गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की बात स्पष्ट रूप से कहें। चुनाव आयुक्त और ईवीएम पर भी बोले चुनाव आयुक्त को लेकर उठ रहे सवालों पर शंकराचार्य ने कहा कि पहले सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब उन्हीं के विभाग की ओर से उसका प्रमाणीकरण हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी व्यवस्था चल रही है तो इस पर क्या कहा जा सकता है। ईवीएम के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब यह बात पुरानी हो चुकी है। उन्होंने अपने जीवन का एक पुराना चुनावी अनुभव भी साझा किया। शंकराचार्य ने बताया कि जब वह काशी पढ़ने आए थे, तब पहली बार मतदाता बने थे। हनुमान घाट पर उनके पिता ने मकान खरीदा था और वहीं रहने के दौरान उनका मतदाता पहचान पत्र बना था। उन्होंने बताया कि पहली बार मतदान के लिए वह कर्नाटक स्टेट स्थित मतदान केंद्र पहुंचे, लेकिन देर से पहुंचने के कारण शाम को जब वोट डालने गए तो उन्हें बताया गया कि उनका वोट पहले ही पड़ चुका है। उस समय मतपत्र से मतदान होता था। उन्होंने इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी। ‘जेन-जी अभी बच्चे हैं, देश में डर का माहौल’ जेन-जी को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि अभी वे बच्चे हैं। उन्हें यह पूरी तरह पता नहीं है कि क्या उचित है और क्या अनुचित और किसी कदम का क्या परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश में डर का वातावरण बना दिया गया है। ऐसे में देश के जो विद्वान और जिम्मेदार लोग हैं, उन्हें युवाओं के समर्थन में खड़ा होना चाहिए। अयोध्या में चोरी के खुलासे पर भी साधा निशाना अयोध्या मामले में 105 बार चोरी के खुलासे से जुड़े सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट से चोरी का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि इसमें कोषाध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन कथित तौर पर उन्हें प्रमोट करके वहीं बैठा दिया गया और उनकी भूमिका तय नहीं की गई। शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि अयोध्या मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होना था, लेकिन यहां तो दूध ही दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 71 लाख गायों की मौत का दावा करते हुए सवाल उठाया कि जब इतनी गायें नहीं रहीं तो दूध कहां से आएगा। उन्होंने कहा कि आंखों का पानी मर गया है, शर्म-लिहाज खत्म हो गया है। शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि जब 71 लाख गायों के पांच साल में मरने की बात सामने आ रही है तो आखिर अब दूध का दूध और पानी का पानी कैसे होगा।
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