बेटे को लेकर अस्पतालों के चक्कर काटती रही मां:4 दिन तक सरकारी संस्थानों में नहीं मिला बेड, प्राइवेट हॉस्पिटल में हुई मौत
लखीमपुर से बीमार बेटे को इलाज के लिए राजधानी लेकर पहुंची मां को चार दिनों तक लखनऊ के अस्पतालों में भटकना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, KGMU और बलरामपुर अस्पताल में इलाज और भर्ती को लेकर उन्हें परेशान होना पड़ा। आखिरकार मदद की तलाश में पहुंचे परिजनों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के नाम पर रकम जमा कराने का दबाव बनाने, आईसीयू में मरीज से मारपीट और मौत के बाद दूसरे अस्पताल के लिए रेफर करने के आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है। 18 साल के बेटे को सांस लेने में तकलीफ हुई लखीमपुर के काशीराम आवास निवासी मोनी गुप्ता के पति का पहले ही निधन हो चुका है। मोनी के मुताबिक, 18 साल के बेटे हिमांशु गुप्ता को सीने में भारीपन और सांस लेने में तकलीफ हुई। 23 सितंबर की रात करीब दो बजे वह उसे लेकर लोहिया संस्थान की इमरजेंसी पहुंचीं। जांच के बाद चिकित्सकों ने हृदय संबंधी गंभीर बीमारी की आशंका जताते हुए हिमांशु को तत्काल KGMU ले जाने की सलाह दी। मोनी के अनुसार इमरजेंसी पहुंचने पर मरीज को ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। ट्रॉमा सेंटर में आईसीयू बेड खाली न होने की बात कही गई। काफी मिन्नतों के बाद मरीज को स्ट्रेचर पर भर्ती किया गया, आरोप है कि दो दिन तक इलाज शुरू नहीं हो सका। बलरामपुर से फिर लारी का रेफर 26 सितंबर को परिजन हिमांशु को बलरामपुर अस्पताल ले गए। इमरजेंसी में जांच के बाद वहां से भी उसे KGMU ले जाने को कहा गया और रेफर लेटर बनाया गया। परिजनों का दावा है कि रेफर लेटर लेकर लारी पहुंचने के बावजूद मरीज को नहीं लिया गया। मदद मांगी तो निजी अस्पताल पहुंचाने का आरोप मोनी के मुताबिक लारी में भर्ती कराने के लिए उन्होंने KGMU के एक अधिकारी के नंबर पर संपर्क किया। इसके बाद दूसरे नंबर से फोन आया और अधिकारी के परिचय का हवाला देते हुए मरीज को नक्षत्रशाला के पास स्थित निजी अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया। आरोप है कि वहां जांच और दवाओं के नाम पर रकम ली गई। अगले दिन 32 हजार रुपये और जमा करने का दबाव बनाया गया। मोनी का कहना है कि हिमांशु आयुष्मान योजना का लाभार्थी था और उनके पास तत्काल रकम नहीं थी। आईसीयू में मारपीट का आरोप मोनी का आरोप है कि रविवार दोपहर करीब एक बजे वह बेटे से मिलने आईसीयू पहुंचीं। हिमांशु ने स्टाफ द्वारा अपने साथ मारपीट किए जाने की बात बताई। उसके नाक से खून निकल रहा था। शिकायत के बाद परिजनों को परेशान किए जाने का आरोप है। देर शाम अस्पताल ने मरीज की हालत गंभीर बताते हुए उसे दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा। परिजनों का दावा है कि दूसरे निजी अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने हिमांशु को मृत घोषित कर दिया। उनका आरोप है कि रेफर किए जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
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