सुरक्षा हटाने पर निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जताई नाराजगी, बोले- ‘राजनीतिक दबाव का प्रयास’

राजस्थान के बाड़मेर जिले में शिव विधानसभा से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा में कटौती के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। भाटी ने इसे राजनीतिक दबाव का प्रयास बताया है, जबकि सरकार और प्रशासन ने इसे नियमित सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा बताया है।

सुरक्षा हटाने पर निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जताई नाराजगी, बोले- ‘राजनीतिक दबाव का प्रयास’

दि राइजिंग न्यूज़ डेस्क | 18 अप्रैल 2026 ।

बाड़मेर (राजस्थान): राजस्थान के बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा एक बार फिर कम कर दी गई है। इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विधायक भाटी ने इसे राजनीतिक दबाव का प्रयास बताया है।

सुरक्षा में की गई इस कमी पर प्रतिक्रिया देते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि उन्हें जनता ने चुना है और वे हमेशा जनता के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णयों से उनके हौसले कमजोर नहीं होंगे और वे जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे।

विधायक भाटी ने कहा, “जिसे ऊपर वाला बचाता है, उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लिए जा रहे फैसले राजनीतिक प्रभाव से प्रेरित हो सकते हैं, लेकिन वे इससे डरने वाले नहीं हैं।

पहले मिल चुकी थी धमकी, बढ़ाई गई थी सुरक्षा

जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में विधायक बनने के बाद रविंद्र सिंह भाटी को एक निजी सुरक्षा अधिकारी दिया गया था। लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने की बात सामने आई थी, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाकर एक अतिरिक्त निजी सुरक्षा अधिकारी तैनात किया गया था।

इसके बाद जनवरी 2025 में सुरक्षा में कुछ कटौती की गई थी, लेकिन कुछ समय बाद फिर से धमकी मिलने की सूचना और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

मार्च 2025 में उनकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी। लेकिन अब राज्य सरकार के निर्देश पर सुरक्षा की समीक्षा के बाद अतिरिक्त सुरक्षा वापस ले ली गई है।

राजनीतिक हलचल तेज

सुरक्षा हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह फैसला सही समय पर नहीं लिया गया, जबकि रविंद्र सिंह भाटी इसे राजनीतिक दबाव से जोड़ रहे हैं।

विधायक ने स्पष्ट किया है कि वे जनता के अधिकारों और मुद्दों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और किसी भी दबाव में नहीं आएंगे।

 सरकारी प्रतिक्रिया

इस मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है।
हालांकि सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा नियमित प्रक्रिया के तहत की गई है।
सरकार का कहना है कि सभी जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा समय-समय पर खतरे के आकलन के आधार पर तय की जाती है।
अधिकारियों के अनुसार किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होता है।
फाइनल निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाता है।


पुलिस/जिला प्रशासन का बयान

जिला पुलिस प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा उच्च स्तर के निर्देशों पर की गई है।
पुलिस का कहना है कि किसी भी विधायक या वीआईपी की सुरक्षा खतरे के आकलन के अनुसार तय होती है।
यदि किसी प्रकार का नया खतरा सामने आता है तो सुरक्षा दोबारा बढ़ाई भी जा सकती है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
इसमें किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या राजनीतिक भूमिका नहीं होती है।


 विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध बताया है।
उनका कहना है कि जब पहले खतरे के आधार पर सुरक्षा बढ़ाई गई थी तो अब अचानक कटौती क्यों की गई।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।
कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव और भेदभाव से जोड़ने की बात भी कही है।
विपक्ष ने मामले की पुनः उच्च स्तरीय समीक्षा की मांग की है।


 लोकल जनता की राय

स्थानीय लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कुछ लोग मानते हैं कि सुरक्षा केवल खतरे के आकलन के आधार पर ही होनी चाहिए।
वहीं कई लोगों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा में अचानक बदलाव चिंता का विषय है।
ग्रामीणों का मानना है कि यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।
जनता चाहती है कि इस मुद्दे पर पारदर्शिता बनी रहे।

मुख्य बिंदु

  • विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा में फिर कटौती
  • भाटी ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप
  • पहले धमकियों के बाद बढ़ाई गई थी सुरक्षा
  • सुरक्षा समीक्षा के बाद सरकार का फैसला
  • राजनीतिक माहौल हुआ गर्म