भतीजे की हत्या में 10 साल बाद चाचा को उम्रकैद:अलीगढ़ में शराब के नशे में भतीजे से हुआ था विवाद, इलाज के दौरान हुई थी मौत

Oct 01, 2026 - 19:53
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भतीजे की हत्या में 10 साल बाद चाचा को उम्रकैद:अलीगढ़ में शराब के नशे में भतीजे से हुआ था विवाद, इलाज के दौरान हुई थी मौत
बन्नादेवी क्षेत्र में करीब 10 साल पहले भतीजे की चाकू घोंपकर हत्या करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-11 रवीश कुमार अत्री ने आरोपी चाचा बबलू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने धारा 302 में आजीवन सश्रम कारावास के साथ 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। मारपीट, गाली-गलौज और अवैध चाकू रखने के मामले में भी अलग-अलग सजा सुनाई गई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और बबलू की जेल में पहले से बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी। गाली-गलौज का विरोध किया तो भड़का विवाद मामला शिवपुरी-रघुवीरपुरी का है। कोर्ट के मुताबिक 6 मई 2016 की रात करीब 12:30 बजे बबलू घर पहुंचा और भतीजे आंशू से गाली-गलौज व मारपीट करने लगा। शोर सुनकर आंशू का छोटा भाई इन्द्रजीत बीच-बचाव करने पहुंचा। अभियोजन के मुताबिक बबलू और उसके साथ मौजूद प्रदीप, राहुल व शिवानी ने इन्द्रजीत को घेर लिया। इसी दौरान बबलू ने उसके पेट में चाकू घोंप दिया। गंभीर रूप से घायल इन्द्रजीत को पहले मलखान सिंह जिला अस्पताल और फिर जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान सुबह उसकी मौत हो गई। पिता जगदीश ने सुबह 6:15 बजे बन्नादेवी थाने में बबलू समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पोस्टमार्टम ने खोली वार की गंभीरता पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी ने अदालत में बताया कि इन्द्रजीत के शरीर पर धारदार हथियार की गहरी चोट थी। चोट से पसली टूटी, फेफड़ा और आंतें क्षतिग्रस्त हुईं और शरीर के अंदर भारी रक्तस्राव हुआ। डॉक्टर के मुताबिक अत्यधिक खून बहने से शॉक और हैमरेज के कारण उसकी मौत हुई। अदालत ने पिता जगदीश, आंशू और रामवीर के बयानों समेत चिकित्सीय और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। चश्मदीद गवाहों ने बबलू को चाकू मारने वाला बताया। विवेचना के दौरान बबलू की निशानदेही पर चाकू भी बरामद हुआ था। बिना लाइसेंस चाकू रखने पर आयुध अधिनियम में अलग मुकदमा दर्ज किया गया। बचाव में कहा-रंजिश में फंसाया बचाव पक्ष ने हत्या से इनकार करते हुए तर्क दिया कि इन्द्रजीत शराब के नशे में किसी नुकीली वस्तु से टकराकर घायल हुआ था। परिवार की रंजिश में बबलू को झूठा फंसाने की बात भी कही गई। कोर्ट ने अभियोजन के मौखिक, चिकित्सीय और बरामदगी संबंधी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित माना। 30 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने बबलू को धारा 302 में उम्रकैद व 10 हजार रुपए जुर्माना, धारा 323 में 3 माह, धारा 504 में 1 साल तथा धारा 4/25 आयुध अधिनियम में 1 साल की सजा और 5 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस मामले में अभियोजन की ओर से मजबूती से प्रयास किए गए। उसी क्रम में सजा हुई है। मामले में दो नाबालिग आरोपियों की पत्रावली अलग किशोर न्यायालय में चल रही है।-तरुण कुमार, एडीजीसी

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