बुंदेलखंड में फसल बर्बादी पर टिकैत ने सरकार को घेरा:बोले- किसान सरकार को खोज रहा, गांवों में कहीं दिखाई नहीं दे रही; ऑर्गेनिक बोर्ड और उचित दाम की मांग
बांदा के कालू कुआं स्थित मंडी समिति परिसर में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन की किसान-मजदूर महापंचायत हुई। दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चली महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत शामिल हुए। सैकड़ों किसान और लोग मौजूद रहे। टिकैत ने बुंदेलखंड में बारिश से फसलों को हुए नुकसान, खाद की किल्लत, उपज के उचित दाम और मुआवजे को लेकर सरकार के सामने सवाल रखे। बुंदेलखंड के अलग-अलग जिलों में किसान महापंचायतों के दौरान टिकैत ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग बोर्ड बनाने की मांग भी उठाई है। बारिश से फसल बर्बाद, अगली बुवाई का संकट मीडिया से बातचीत में टिकैत ने कहा कि उनका कार्यक्रम पूरे बुंदेलखंड में चल रहा है। ललितपुर, झांसी, महोबा और बांदा समेत अलग-अलग जिलों में किसानों की स्थिति देखने के बाद खेती के सामने संकट की स्थिति दिखाई दे रही है। बारिश से बड़ी संख्या में फसलें बर्बाद हुई हैं। जो फसल बची है, किसानों को उसका भी उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के सामने अगली फसल की बुवाई का संकट खड़ा है। ऐसे में सरकार को गांवों में पहुंचकर किसानों की वास्तविक स्थिति और नुकसान को देखना चाहिए। बोले- किसान सरकार को खोज रहा, सरकार कहीं दिखाई नहीं दे रही सरकार की ओर से किसानों के हित में काम करने और मुआवजा देने के दावों पर टिकैत ने कहा कि इसकी वास्तविक स्थिति गांवों में जाकर ही पता चलेगी। उन्होंने कहा कि किसान सरकार को खोज रहा है, लेकिन सरकार कहीं दिखाई नहीं दे रही। टिकैत ने कहा कि कागजों में राहत और मुआवजे की बातें होती हैं, जबकि गांवों में किसान फसल के नुकसान से परेशान है। सरकार को किसानों के बीच पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करना चाहिए और तत्काल राहत देनी चाहिए। खाद की किल्लत पर जैविक खेती का मुद्दा उठाया खाद की किल्लत के सवाल पर टिकैत ने कहा कि यह समस्या पूरे देश में है। उन्होंने बुंदेलखंड में रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही। बुंदेलखंड के लिए अलग ऑर्गेनिक बोर्ड बनाने की मांग करते हुए उन्होंने किसानों को जैविक उत्पादों का बाजार उपलब्ध कराने की बात कही। टिकैत ने बुंदेलखंड को ‘ऑर्गेनिक स्टेट’ घोषित करने की मांग भी उठाई। इससे पहले ललितपुर और महोबा की किसान पंचायतों में भी वह बुंदेलखंड में जैविक बोर्ड के गठन और जैविक खेती को बढ़ावा देने की मांग कर चुके हैं। किसानों ने फसल नुकसान और उचित दाम का मुद्दा उठाया महापंचायत में किसानों की समस्याओं और फसल नुकसान से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। टिकैत ने कहा कि किसानों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी उपज का उचित दाम, फसल नुकसान की भरपाई और खेती के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत है। बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज की मांग भी हाल की किसान पंचायतों में उठाई गई है।
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