CEC आवास मामला, कमिश्नर से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल:बोले-प्रदर्शनकारियों पर गलत धारा लगाकर लोकतंत्र को कुचल रही पुलिस

Sep 30, 2026 - 17:15
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CEC आवास मामला, कमिश्नर से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल:बोले-प्रदर्शनकारियों पर गलत धारा लगाकर लोकतंत्र को कुचल रही पुलिस
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक निवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन कर गेट पर कालिख पोतने और अपशब्द लिखने के मामले में पुलिस ने हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दिया था। इसके विरोध में बुधवार को कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से किया गया था। अगर कार्रवाई करनी है तो कानून के दायरे में जो धारा बनती है, उसके तहत कार्रवाई हो। पुलिस गलत धाराएं लगाकर लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश कर रही है। नेताओं ने कहा कि धारा लगाने और जेल भेजने से कांग्रेस डरने वाली नहीं है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हमारे नेता खड़े हैं। जब तक ज्ञानेश कुमार नहीं हटेंगे, तब तक सड़क से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ी जाएगी। ये है पूरा मामला… मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास पर हंगामा और तोड़फोड़ के मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया। सीजेएम सारिब अली की कोर्ट ने सभी को 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। दरअसल, सोमवार सुबह करीब 10 बजे कांग्रेस के प्रदेश संगठन महासचिव अनिल यादव और मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक कार्यकर्ता विजयनगर कॉलोनी स्थित सीईसी के पैतृक आवास पर पहुंच गए थे। घर में उनके माता-पिता रहते हैं। आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने एसआईआर के विरोध में गेट पर काले पेंट से अमर्यादित शब्द लिखे और जमकर नारेबाजी की। इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया। मामला लखनऊ तक पहुंचते ही पुलिस हरकत में आई। थाना हरीपर्वत पुलिस ने केस दर्ज कर घेराबंदी की। सोमवार को ही जेवर टोल से अनिल यादव और मुकेश धनगर को गिरफ्तार कर लिया गया। देर रात पुलिस ने चार और साथियों को पकड़ लिया। पुलिस की ओर से दर्ज FIR में हत्या का प्रयास, अराजकता फैलाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। कोर्ट ने मांगा जवाब मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे पुलिस सभी छह आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में सीजेएम कोर्ट लेकर पहुंची। आरोपियों की ओर से जमानत अर्जी नहीं लगाई गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया। साथ ही विवेचक को निर्देश दिया कि FIR में धारा 109(1) किन साक्ष्यों के आधार पर लगाई गई है, इसका जवाब 3 अक्टूबर तक दाखिल करें। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। इस मामले में नामजद अनिल यादव, मुकेश धनगर, राजेश, मनोज गौड़, करण सिंह निषाद, विक्रम वाल्मीकि, उमेश शर्मा और राजा गौतम सहित 20 अज्ञात आरोपी हैं। अन्य को चिह्नित कर लिया गया है, जल्द गिरफ्तारी होगी। पेशी के दौरान नारेबाजी, दीवानी में भीड़ जुटी कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता भी पहुंच गए। जैसे ही पुलिस आरोपियों को जेल ले जाने लगी, पुलिस के सामने ही कांग्रेसी नारेबाजी करने लगे। 'ये दीवाने कहां चले, जेल चले भाई जेल चले' जैसे नारे लगाए गए। शोर सुनकर कोर्ट परिसर के बाहर अधिवक्ताओं और वादकारियों की भीड़ लग गई। सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम पुलिस को आशंका थी कि पेशी के दौरान कांग्रेसी फिर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसको लेकर थाना हरीपर्वत से लेकर जिला अस्पताल में मेडिकल और दीवानी तक जगह-जगह फोर्स तैनात की गई। सभी थानों को अलर्ट पर रखा गया। कलेक्ट्रेट, सुभाष पार्क, सेंट जॉन्स, हरीपर्वत चौराहे तक पुलिस बल लगा रहा। दीवानी परिसर में पहले से ही बैरिकेडिंग कर दी गई थी। दो-दो आरोपियों को अलग-अलग गाड़ी से कोर्ट लाया गया। इन्हें भेजा गया जेल जेल भेजे गए आरोपियों में आजमगढ़ के थाना सिधारी के गांव शाहबाजपुर और हाल लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र के वृंदावन योजना निवासी अनिल यादव, मथुरा कोतवाली के जनकपुरी मोहाली रोड निवासी मुकेश धनगर, सहमलपुरा की होली वाली गली निवासी मनोज गौड़, यमुनापार के नगला पोला निवासी राजेश कुमार, पटलोनी निवासी राजा गौतम और बल्देव के गांव हथौड़ा निवासी पंकज चौधरी शामिल हैं। इनमें पांच आरोपी मथुरा के रहने वाले हैं।

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