बढ़ी लागत से किसान भारी संकट में

छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में बढ़ती खेती लागत, खाद की कमी, बिजली संकट और बाजार में घटती मांग के कारण किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कई किसानों को अपनी फसल तक नष्ट करनी पड़ रही है।

बढ़ी लागत से किसान भारी संकट में

दि राइजिंग न्यूज़। दुर्ग (छत्तीसगढ़)। 3 जून 2026

छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में बागवानी किसानों पर बढ़ती खेती लागत, महंगे डीजल, खाद की कमी और बाजार में घटती मांग का दोहरा दबाव बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, जबकि फसलों को उचित खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई किसानों को अपनी उपज खेतों में ही नष्ट करनी पड़ रही है।

बढ़ती लागत ने बढ़ाई किसानों की चिंता

छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र के बागवानी किसान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती में उपयोग होने वाले लगभग सभी संसाधनों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। डीजल, सिंचाई उपकरण, प्लास्टिक पाइप, मल्चिंग शीट और अन्य कृषि सामग्री की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। किसानों के अनुसार खेती की कुल लागत पिछले कुछ समय में 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है।

करेला और पपीता उत्पादकों पर सबसे ज्यादा असर

धमधा क्षेत्र में करेला और पपीता की खेती करने वाले किसान सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि बड़ी मेहनत और निवेश के बाद तैयार हुई फसल समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है। परिवहन लागत बढ़ने और मांग घटने के कारण व्यापारियों ने पर्याप्त मात्रा में खरीद नहीं की, जिसके चलते बड़ी मात्रा में फसल खेतों में ही खराब हो गई।

बाजार में खरीदार नहीं मिलने से बढ़ा नुकसान

किसानों के मुताबिक पहले उनकी उपज देश के विभिन्न हिस्सों तक भेजी जाती थी, लेकिन अब बाजार में मांग कम होने के कारण बिक्री प्रभावित हो रही है। उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उन्हें भविष्य में खेती जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।

खाद और बिजली संकट ने बढ़ाई परेशानी

किसानों का आरोप है कि समय पर उर्वरकों की उपलब्धता नहीं हो रही है। कई बार जरूरत के समय खाद नहीं मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति में अनियमितता भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। बिजली कटौती के कारण किसानों को डीजल चालित पंपों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे सिंचाई लागत और बढ़ गई है।

डीजल खर्च में भारी बढ़ोतरी

स्थानीय किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर और पंपसेट चलाने का खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। जो कार्य पहले कम लागत में हो जाता था, अब उसके लिए कहीं अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है। नियमित सिंचाई वाली फसलों में डीजल की खपत अधिक होती है, इसलिए बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है।

फसल बर्बाद होने का डर

कई किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं उन्हें फिर से अपनी फसल खेतों में ही नष्ट न करनी पड़े। किसानों की मांग है कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे उन्हें उनकी उपज का न्यूनतम और सुनिश्चित मूल्य मिल सके। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत और लाखों रुपये के निवेश के बाद यदि फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता तो उनका पूरा आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है।

सरकार से समाधान की उम्मीद

किसानों की समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार से भी इस विषय पर प्रतिक्रिया मांगी गई है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार बढ़ती लागत, खाद की कमी, बिजली संकट और बाजार की अनिश्चितता जैसी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाएगी। फिलहाल धमधा क्षेत्र के किसान बढ़ती महंगाई, संसाधनों की कमी और बाजार संकट के बीच अपनी खेती को बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।