बच्चियों में जल्दी पीरियड्स, डॉक्टरों ने बताई सबसे बड़ी वजह

देश में कम उम्र की बच्चियों में समय से पहले मासिक धर्म के मामले बढ़ रहे हैं। जानिए इसके प्रमुख कारण, संभावित स्वास्थ्य जोखिम, शुरुआती संकेत और डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह।

बच्चियों में जल्दी पीरियड्स, डॉक्टरों ने बताई सबसे बड़ी वजह

दि राइजिंग न्यूज़ | भारत | 26 जून 2026


समय से पहले मासिक धर्म क्यों बन रहा है चिंता का विषय

बाल रोग विशेषज्ञों और हार्मोन रोग विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता। यदि किसी बच्ची में 8 वर्ष की आयु से पहले यौन विकास के संकेत या 9 वर्ष से पहले मासिक धर्म शुरू हो जाए तो इसे समयपूर्व यौवनारंभ की स्थिति माना जाता है। इससे बच्चियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर असर पड़ सकता है। कई बार बच्चियां इस बदलाव को समझ नहीं पातीं, जिससे उनमें डर, झिझक और मानसिक तनाव पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और उपचार न मिलने पर भविष्य में हार्मोन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए माता-पिता को शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।


क्या हैं समय से पहले मासिक धर्म आने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। बदलती जीवनशैली, बढ़ता मोटापा, अत्यधिक जंक फूड का सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और हार्मोन पर असर डालने वाले रसायनों के संपर्क को प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसके अलावा आनुवंशिक कारण, कुछ हार्मोन संबंधी बीमारियां और दुर्लभ मामलों में मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। कुछ शोधों में यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों के सामने रहने से बच्चों की दिनचर्या प्रभावित होती है, जिसका असर शरीर के हार्मोन संतुलन पर पड़ सकता है। हालांकि हर बच्ची का मामला अलग होता है, इसलिए बिना जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता।


बच्चियों के स्वास्थ्य पर क्या पड़ सकता है असर

समय से पहले मासिक धर्म आने से बच्चियों की लंबाई अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ पाती क्योंकि हड्डियों का विकास जल्दी रुक सकता है। इसके अलावा मानसिक तनाव, आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक असहजता जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। कम उम्र में इस तरह के बदलाव से बच्चियों के व्यवहार और पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है। भविष्य में हार्मोन संबंधी विकार, मोटापा, मधुमेह और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर सही इलाज और निगरानी की जाए तो इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


किन संकेतों पर तुरंत सतर्क हो जाएं माता-पिता

यदि बच्ची में कम उम्र में स्तनों का विकास शुरू हो, शरीर पर बाल आने लगें, शरीर से तेज गंध आने लगे या अचानक लंबाई तेजी से बढ़ने लगे तो यह समयपूर्व यौवन के संकेत हो सकते हैं। कुछ मामलों में चेहरे पर मुंहासे आना, मूड में अचानक बदलाव या मासिक धर्म शुरू होने से पहले सफेद स्राव जैसी स्थितियां भी दिखाई दे सकती हैं। ऐसे लक्षणों को सामान्य विकास समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या हार्मोन विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए ताकि आवश्यक जांच कर सही कारण का पता लगाया जा सके और समय पर उपचार शुरू हो सके।


माता-पिता क्या सावधानियां अपनाएं

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चियों को संतुलित और पौष्टिक भोजन दिया जाए तथा जंक फूड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखा जाए। नियमित खेलकूद, योग और शारीरिक गतिविधियों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि वजन नियंत्रित रहे और शरीर का हार्मोन संतुलन बना रहे। पर्याप्त नींद और तनावमुक्त वातावरण भी बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी माना जाता है। माता-पिता को बच्चियों के व्यवहार और शारीरिक बदलावों पर नियमित नजर रखनी चाहिए। यदि कोई असामान्य परिवर्तन दिखाई दे तो घरेलू उपायों पर भरोसा करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।