दहेज हत्या के मामले में सास-ससुर को सजा:फतेहपुर में कोर्ट ने दहेज हत्या, प्रताड़ना और दहेज मांगने के मामले में दोषी ठहराया
फतेहपुर में अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-2 (FTC-2) न्यायालय के पीठासीन अधिकारी अजय सिंह प्रथम ने दहेज हत्या के एक मामले में फैसला सुनाते हुए मृतका के ससुर और सास को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने बुधवार को दोनों आरोपियों को सजा सुनाई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) अजय कुमार सिंह (शूरवीर) और रणधीर सिंह ने पैरवी की। मामला फतेहपुर के खागा थाना क्षेत्र का है। वादी छोटेलाल निवासी मलाका, थाना गाजीपुर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बहन माधुरी देवी की शादी 11 मई 2011 को ग्राम पांभीपुर निवासी शेर सिंह के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति शेर सिंह, ससुर रामबाबू, सास आशा देवी और ननदें प्रभा देवी व कुसमा देवी कम दहेज मिलने को लेकर माधुरी को मारपीट कर प्रताड़ित करते थे। आरोप था कि ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज के रूप में 2 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। आरोप के अनुसार, 1 मार्च 2017 की सुबह करीब 7 बजे पति के घर से बाहर जाने के बाद ससुराल पक्ष के लोगों ने माधुरी देवी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। मृतका का 2 वर्ष का एक बच्चा भी था। घटना के संबंध में खागा थाने में मुकदमा अपराध संख्या 119/17 के तहत धारा 498ए, 304बी आईपीसी और धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन की ओर से मामले में कुल 8 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने ससुर रामबाबू और सास आशा देवी को दोषी ठहराया। धारा 304बी आईपीसी (दहेज हत्या) के तहत रामबाबू और आशा देवी को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। धारा 498ए आईपीसी (प्रताड़ना) के तहत दोनों को 2-2 वर्ष के कारावास और 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई। वहीं, धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोनों को 1-1 वर्ष के कारावास और 1-1 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
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