पेट्रोल पंपों पर नया सरकारी आदेश: अब 1 बूंद भी ज्यादा नहीं मिलेगा ..
देशभर में डीजल की बिक्री को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नए नियम के तहत रिटेल पेट्रोल पंपों से एक वाहन को अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। थोक खरीदारों को अब अधिकृत केंद्रों से ही ईंधन खरीदना होगा। सरकार का दावा है कि इससे कालाबाजारी रुकेगी और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 13 जून 2026
देश में पेट्रोल-डीजल पर लगा कोटा सिस्टम! अब तय लिमिट से एक बूंद भी ज्यादा नहीं मिलेगा ईंधन
देश में ईंधन की आसमान छूती कीमतों और तेल की कालाबाजारी के बीच सरकार ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है. सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी आर्थिक नुकसान को रोकने और राजस्व को बचाने के लिए सरकार ने देश के तमाम पेट्रोल पंपों पर तत्काल प्रभाव से 'कोटा सिस्टम' लागू कर दिया है. सरकार के इस नए और सख्त आदेश के बाद अब कोई भी ग्राहक पेट्रोल पंपों से अपनी मनमर्जी के मुताबिक भारी मात्रा में डीजल नहीं खरीद पाएगा. इस नए नियम ने पूरे देश के थोक खरीदारों से लेकर आम वाहन चालकों तक के बीच एक नई बहस और हड़कंप की स्थिति पैदा कर दी है.
अब केवल 200 लीटर ही मिलेगा डीजल, तय की गई अधिकतम लिमिट
सरकार के नए नियमों के तहत अब पेट्रोल पंपों पर प्रति वाहन डीजल की बिक्री को लेकर एक कड़ा कोटा निर्धारित कर दिया गया है. नए आदेश के मुताबिक, अब कोई भी आम जनता का नागरिक या छोटा कमर्शियल वाहन चालक किसी भी रिटेल पेट्रोल पंप से एक बार में या पूरे दिन में अधिकतम 200 लीटर से ज्यादा डीजल बिल्कुल नहीं खरीद पाएगा. इस सीमा के तय होने से अब उन लोगों पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी जो अपनी गाड़ियों में या बड़े कंटेनरों में अवैध रूप से भारी मात्रा में डीजल भरकर ले जाते थे. यह नया नियम देश के सभी पेट्रोल पंपों पर तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है ताकि ईंधन के वितरण को पारदर्शी और सुचारू बनाया जा सके.
थोक खरीदारों पर लगी पूर्ण पाबंदी, रिटेल पंपों से नहीं मिलेगा तेल
इस नए सरकारी आदेश का सबसे बड़ा झटका उन थोक खरीदारों (बल्क बायर्स) को लगा है जो अब तक आम पेट्रोल पंपों से सस्ते दामों में भारी मात्रा में ईंधन खरीद लिया करते थे. नए नियम के लागू होने के बाद अब देश के बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल, अस्पताल, बड़ी फैक्ट्रियां, नामचीन ट्रैवल एजेंसियां और निजी बस ऑपरेटर्स सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों पर जाकर डीजल की खरीदारी नहीं कर पाएंगे. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन सभी बड़े संस्थानों और थोक खरीदारों को अब केवल और केवल सरकार द्वारा अधिकृत 'बल्क सेल पॉइंट्स' से ही डीजल खरीदना होगा, जिससे आम पेट्रोल पंपों पर दबाव काफी कम हो जाएगा.
आखिर क्यों लागू करना पड़ा कोटा सिस्टम जानें इसके पीछे का असली खेल
सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बाजार के एक बहुत बड़े खेल और गड़बड़ी का खुलासा किया है. दरअसल, इस समय आम पेट्रोल पंपों (रिटेल) पर मिलने वाले डीजल की कीमत और थोक (बल्क) में मिलने वाले डीजल की कीमत के बीच एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला अंतर आ चुका है. उदाहरण के तौर पर, देश की राजधानी दिल्ली के आम पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत जहां मात्र 95.20 रुपये प्रति लीटर है, वहीं थोक में इसकी कीमत 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है. इसी भारी अंतर का फायदा उठाने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियां और फैक्ट्रियां थोक बाजार के बजाय आम पेट्रोल पंपों से ही भारी मात्रा में डीजल खरीद रही थीं, जिससे सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था.
केवल गाड़ियों के टैंक और मंजूर कंटेनर में ही मिलेगा ईंधन, दोबारा बेचने पर रोक
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में यह साफ तौर पर हिदायत दी गई है कि रिटेल आउटलेट डीलर यानी पेट्रोल पंप संचालक केवल गाड़ियों के असली टैंक में या फिर 'पेसो' (PESO) द्वारा प्रमाणित व मंजूरशुदा विशेष कंटेनर में ही हाई स्पीड डीजल (HSD) की सप्लाई करेंगे. इसके अलावा, इस तरह खरीदे गए डीजल को किसी भी अन्य व्यक्ति या संस्था को दोबारा ऊंचे दामों पर बेचने (डायवर्जन या री-सेल) पर पूरी तरह से कानूनी पाबंदी लगा दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल असली और जरूरतमंद ग्राहकों के लिए पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को हर समय सुनिश्चित करना और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकना है.
तीन महीने के लिए लागू रहेगा आदेश, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरे
सरकार का यह नया और बेहद कड़ा आदेश पूरे देश में तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और नोटिफिकेशन के अनुसार इसे शुरुआती तौर पर अधिकतम तीन महीने की अवधि के लिए जारी किया गया है. इसी बीच वैश्विक स्तर से भी एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक नए कूटनीतिक समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत अचानक लुढ़ककर 86 डॉलर प्रति बैरल के भी नीचे आ गई है, जिससे आने वाले समय में घरेलू बाजार में भी तेल की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है.