डीजे पर सामूहिक प्रतिबंध से भड़के संचालक:डीएम से बोले- दोषी पर हो कार्रवाई, पूरे कारोबार को न मिले सजा
बलरामपुर में विद्यालय में मासूम बच्ची की दुर्भाग्यपूर्ण मौत की घटना के बाद जनपद में डीजे और साउंड सिस्टम पर लगाए गए सामूहिक प्रतिबंध को लेकर डीजे संचालक संघ ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और नियमबद्ध संचालन की अनुमति देने की मांग उठाई। संचालकों ने घटना पर गहरी संवेदना जताते हुए कहा कि ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन किसी एक घटना के आधार पर पूरे व्यवसाय को प्रतिबंधित करना उचित नहीं है। ज्ञापन में कहा गया कि घटना के वास्तविक कारण का निर्धारण पुलिस जांच, चिकित्सकीय रिपोर्ट और उपलब्ध वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति, आयोजक या डीजे संचालक द्वारा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन कुछ लोगों की गलती का खामियाजा पूरे डीजे कारोबार से जुड़े परिवारों को न भुगतना पड़े। पारदर्शी अनुमति व्यवस्था लागू करने की मांग संघ ने प्रशासन से डीजे के लिए स्पष्ट ध्वनि सीमा, निर्धारित समय-सीमा और पारदर्शी अनुमति व्यवस्था लागू करने की मांग की। साथ ही मौके पर साउंड लेवल मीटर से ध्वनि की जांच की व्यवस्था करने तथा विद्यालय, अस्पताल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विशेष नियम तय करने का आग्रह किया। संचालकों ने आयोजक और डीजे संचालक की जिम्मेदारियां भी लिखित रूप से तय करने की मांग रखी। उनका कहना है कि कार्यक्रम का मार्ग, भीड़ नियंत्रण और आयोजन व्यवस्था आयोजक की जिम्मेदारी हो, जबकि डीजे संचालक निर्धारित ध्वनि सीमा और प्रशासनिक निर्देशों के अनुरूप साउंड सिस्टम चलाने के लिए जिम्मेदार हो। ज्ञापन में प्रशासन और डीजे संचालकों की संयुक्त बैठक कर SOP और स्पष्ट नियमावली तैयार करने तथा नियमों का पालन करने वाले संचालकों की अधिकृत सूची बनाने का सुझाव भी दिया गया। संघ ने कहा कि डीजे कारोबार से संचालकों के अलावा ड्राइवर, ऑपरेटर, हेल्पर, लाइट ऑपरेटर, तकनीशियन और छोटे व्यवसायी जुड़े हैं। अचानक पूर्ण प्रतिबंध से इनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। ज्ञापन देने वालों में प्रकाश, रोहन, मनीष, राधेश्याम, बाबूलाल, संजय और सोनू समेत दर्जनों डीजे संचालक मौजूद रहे।
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