दुसरे दिन तक निकलता रहा पंखा फैक्ट्री से धुआं:20 साल से काम कर रहे कर्मचारी बोले- अब रोजी-रोटी का संकट
मंडुवाडीह तिराहे पर की पंखा फैक्टरी रवि प्रकाश लिमिटेड में सोमवार सुबह करीब 4 बजे लगी आग का असर मंगलवार तक दिखा। आग बुझने के बाद भी फैक्टरी से धुआं निकलता रहा और अंदर रखा सामान जलकर खाक हो चुका था। फैक्टरी से सटे घर के मालिक राजीव ने बताया कि आग बहुत भयानक थी। फैक्टरी में रखा केमिकल गर्म होने के बाद शाम करीब 4-5 बजे धमाके करने लगा और आग ने फिर विकराल रूप पकड़ लिया। पास स्थित मेघना हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. मधुमेश्वरी ने बताया कि सुबह 5:45 बजे उन्हें जगाया गया तो बिल्डिंग से बिल्कुल सटी फैक्टरी में आग की लपटें निकल रही थीं। आग बुझाने में घंटों मशक्कत हुई और आसपास के लोगों में लगातार अफरा-तफरी बनी रही। कंपनी के मैनेजर ने कहा नुकसान का अनुमान लगाना अभी मुश्किल है। वर्कर ने कहा अब तो जॉब के लिए सोचना होगा। ये कंपनी 1975 से संचालित है मंडुवाडीह तिराहे पर फैक्टरी 7 साल पहले लगाई गई थी। देखे सुबह की तस्वीरें सुबह फोन आया- आपके बगल में आग लगी है फैक्टरी से सटे घर के मालिक राजीव ने बताया कि उनका मकान फैक्टरी से एकदम सटा हुआ है। दोनों की दीवारें आपस में लगी हुई हैं। सुबह करीब 5 बजे उन्हें सूचना मिली कि उनके घर के बगल में आग लगी हुई है। घर में रहने वाले लोगों ने वीडियो कॉल कर उन्हें दिखाया कि आपके बगल में आग लगी है। राजीव ने बताया कि ऐसी आग उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखी थी। आग बहुत ज्यादा भयानक थी। फैक्टरी में केमिकल रखा हुआ था। शाम करीब 4-5 बजे केमिकल में ब्लास्ट होने लगा। इसके बाद आग और ज्यादा फैल गई और उसने विकराल रूप पकड़ लिया। आग बढ़ती गई, अंदर से ब्लास्ट की आवाज आती रही राजीव ने बताया कि आग पहले से ही काफी ज्यादा थी, लेकिन केमिकल गर्म होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। अंदर से ब्लास्ट होने लगा और आग बाहर की तरफ भी बढ़ने लगी। अस्पताल से जस्ट साइड वाली बिल्डिंग में दिखीं लपटें मेघना हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. मधु महेश्वरी ने बताया कि आग का अनुभव उनके लिए “फ्राइटनिंग” था। उन्होंने कहा कि सुबह करीब 5:45 बजे उन्हें उठाया गया। उस समय देखा कि अस्पताल से जस्ट साइड वाली बिल्डिंग से आग की लपटें निकल रही थीं। उन्होंने बताया कि वहां वॉचमैन था, जो शॉर्ट सर्किट होने के बाद बाहर भाग गया था। फैक्टरी में काफी केमिकल और स्टॉक रखा था, इसलिए आग ने बहुत तेजी से पकड़ ली। अस्पताल ने भी अपनी तरफ से पानी डालने की कोशिश की डॉ. मधु महेश्वरी ने कहा कि अस्पताल के फायर सिस्टम को एक्टिवेट किया गया। स्टाफ ने अपनी तरफ से भी आग वाली तरफ पानी डालने की कोशिश की। आसपास के 4-5 लोग भी मदद के लिए पहुंचे। करीब आधे घंटे बाद फायर एक्सटिंग्विशन टीम पहुंची। उन्होंने बताया कि जगह काफी क्लोज थी और दमकल की गाड़ियों को सीधे अंदर आने में दिक्कत हो रही थी। इसके कारण दूर से पाइप लगाकर पानी का प्रेशर दिया गया और धीरे-धीरे आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। दोपहर में लगा कंट्रोल हो गया, फिर दोबारा भड़क गई आग डॉ. मधु महेश्वरी ने बताया कि करीब एक बजे ऐसा लग रहा था कि आग कंट्रोल में आ गई है। सामने की तरफ से पानी डाला जा रहा था। लेकिन बाद में जब ओपीडी के बाद ऊपर गए तो सुबह जैसा सीन दोबारा दिखाई दिया। बिल्डिंग में क्रैक दिखे तो डर और बढ़ गया डॉ. मधु महेश्वरी ने बताया कि शाम तक बिल्डिंग में क्रैक दिखाई देने लगे थे। ऐसे में डर था कि कहीं बिल्डिंग गिरने की स्थिति न बन जाए और आसपास के लोगों को परेशानी हो। उन्होंने बताया कि अस्पताल का स्टाफ लगातार स्थिति को मॉनिटर कर रहा था। अस्पताल में ज्यादा मरीज नहीं थे, इसलिए एक राहत रही। जनरेटर को भी सुरक्षित करने की कोशिश की गई। आग बुझाने वाली टीम रात तक छुटपुट आग को मॉनिटर करती रही। हर थोड़ी देर में पानी की रिफिलिंग होती रही डॉ. मधु महेश्वरी के मुताबिक, फायर की गाड़ियां लगातार आती-जाती रहीं। करीब हर 10-15 मिनट में पानी की रिफिलिंग की जा रही थी। शुरुआत में अस्पताल की सबमर्सिबल से भी पानी की सप्लाई की गई। उन्होंने बताया कि टीम के साथ आसपास के लोगों ने भी सहयोग किया। पूरे समय स्टाफ यह देखता रहा कि आगे क्या होने वाला है और किस तरफ से खतरा बढ़ सकता है। 20 साल से कंपनी में काम, अब रोजी-रोटी की चिंता कंपनी में लोडिंग का काम करने वाले नथुराराम यादव ने बताया कि वह करीब 20 साल से कंपनी में काम कर रहे हैं। कंपनी बंद होने से उन्हें अब अपनी रोजी-रोटी की चिंता है। उन्होंने कहा कि कंपनी चलने से लोगों को बहुत तकलीफ होती थी, लेकिन अब कंपनी बंद होने के बाद कर्मचारियों के सामने भी परेशानी शुरू हो जाएगी। इतने साल से इसी जगह काम कर रहे लोगों के लिए अब आगे क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। मैनेजर बोले- पहले रिकवरी कैसे हो, यही प्राथमिकता कंपनी के मैनेजर ने बताया कि गार्ड के माध्यम से सूचना मिलने के बाद फायर की गाड़ियां करीब 5 बजे के आसपास आने लगी थीं। सभी स्टाफ ने मिलकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अभी सबसे पहले यह देखना है कि जितना जल्दी रिकवर हो सकें, उतना जल्दी रिकवर हों। इतने सालों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई और नुकसान को बता पाना अभी मुश्किल है। फिलहाल प्राथमिकता यह है कि कंपनी की रिकवरी कैसे की जाए। फैक्टरी के मालिक, जो घटना के समय बाहर गए हुए थे, अब वापस आ गए हैं। हालांकि, उन्होंने अभी घटना और नुकसान को लेकर बात नहीं की है। अब सवाल सिर्फ नुकसान का नहीं, आगे की रोजी-रोटी का भी आग ने फैक्टरी का सामान तो जला दिया, लेकिन उसके साथ यहां काम करने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। अगली सुबह तक निकलता धुआं इस बात का संकेत था कि आग का असर कितने लंबे समय तक रहा। एक तरफ फैक्टरी के मालिक के सामने नुकसान और रिकवरी की चुनौती है, तो दूसरी तरफ 20 साल से यहां काम कर रहे कर्मचारियों के सामने अब अपनी रोजी-रोटी चलाने का सवाल है। आसपास के घर और अस्पताल में रहने वाले लोग भी इस घटना के बाद अब सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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