गाजीपुर में आबादी की जमीन के लिए 5.-घंटे डटे ग्रामीण:डीएम से नहीं हो सकी मुलाकात, एक बिस्वा में 35 परिवार रहने को मजबूर
गाजीपुर के शेरपुर कला गांव में आबादी की जमीन का मामला गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंच गया। सुबह करीब 11 बजे सैकड़ों महिला-पुरुष और बच्चे जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे। डीएम से मुलाकात नहीं होने पर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक से मिलने गए और इसके बाद जिलाधिकारी आवास पहुंचे। आवास के बाहर काफी देर बैठने के बाद पुलिस ने उन्हें सदर तहसील भेज दिया। वहां एसडीएम से बातचीत हुई, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। करीब साढ़े पांच घंटे तक जिला मुख्यालय और तहसील में अधिकारियों से मुलाकात की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीण शाम 4:30 बजे निराश होकर गांव लौट गए। 1975 से एक बिस्वा जमीन में रह रहा परिवार ग्रामीण अखनू ने बताया कि उनका परिवार वर्ष 1975 से करीब एक बिस्वा जमीन पर रह रहा है। उस समय यहां एक परिवार रहता था, लेकिन अब इसी जगह करीब 35 परिवार रह रहे हैं। उनका दावा है कि कई घरों में 20 से 25 तक लोग रहने को मजबूर हैं। अखनू के मुताबिक, वह और ग्रामीण डीएम व एसडीएम को करीब 50 बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि आबादी की जमीन पर रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने से परिवारों को परेशानी हो रही है। वे प्रशासन से उपलब्ध आबादी की जमीन का सर्वे कराकर जरूरतमंद और पात्र परिवारों को रहने के लिए जगह उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। जमीन पर दीवार बनाने को लेकर विवाद का आरोप अखनू के मुताबिक, गांव में आबादी की जमीन पर एक सवर्ण परिवार की ओर से दीवार बनाने की कोशिश की जा रही थी। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो विवाद और मारपीट हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मोहम्मदाबाद तहसील में एसडीएम से मिलने पर उन्हें बताया गया कि संबंधित जमीन किसी के नाम दर्ज कराई जा चुकी है। ग्रामीणों का दावा है कि यह जमीन पहले हरिजन आबादी के रूप में दर्ज रही है। इसी को लेकर वे राजस्व अभिलेखों की जांच कराकर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। 1,470 मतदाता, करीब 2,500 आबादी का दावा ग्रामीणों के अनुसार शेरपुर कला में करीब 1,470 मतदाता और लगभग 2,500 की आबादी है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आबादी के बीच कई परिवारों के पास रहने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन आबादी की जमीन का सर्वे कराकर पात्र परिवारों को रहने के लिए स्थान उपलब्ध कराए। गांव की उर्मिला देवी ने कहा, “मांग करते-करते चप्पल घिस गई। कई बार शेरपुर से जिला मुख्यालय तक पैदल आए, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई।” उन्होंने बताया कि गुरुवार को भी ग्रामीण अपनी समस्या जिलाधिकारी के सामने रखने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। पहले एसपी, फिर डीएम आवास पहुंचे ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने पहले अधिकारियों से मुलाकात की कोशिश की। जिलाधिकारी से भेंट नहीं होने पर वे पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे। वहां भी बात नहीं बनी तो ग्रामीण जिलाधिकारी आवास पहुंच गए। आवास के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलने पर वे मुख्य गेट के सामने बैठ गए। काफी देर तक ग्रामीणों के वहां बैठे रहने के बाद पुलिस पहुंची और उन्हें सदर तहसील जाने के लिए कहा। इसके बाद ग्रामीण तहसील पहुंचे, जहां एसडीएम से बातचीत हुई। ग्रामीणों के मुताबिक, एसडीएम ने उन्हें मोहम्मदाबाद तहसील जाकर तहसीलदार के सामने अपनी बात रखने के लिए कहा और संबंधित अधिकारियों को जानकारी देने की बात कही। ग्रामीणों ने कहा कि वे पहले भी कई बार तहसील स्तर पर शिकायत कर चुके हैं। इस बार वे जिलाधिकारी से सीधे अपनी समस्या बताने आए थे। उनका कहना था कि केवल अधिकारियों को सूचना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक पात्र परिवारों को रहने के लिए आबादी की जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाती। करीब 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक इंतजार और अधिकारियों से मुलाकात के प्रयास के बाद भी जिलाधिकारी से भेंट नहीं हो सकी। इसके बाद महिलाएं, पुरुष और बच्चे मायूस होकर शेरपुर कला के लिए रवाना हो गए।
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