गोरखपुर में नुक्कड़ नाटक से स्वच्छता का संदेश:‘विरासत भी, विकास भी’ से बदली सोच, बच्चों को मिली जिम्मेदारी की सीख
गोरखपुर के शिवपुर सहबाजगंज स्थित एक स्कूल में आयोजित नुक्कड़ नाटक ‘विरासत भी, विकास भी, स्वच्छता की नई कहानी’ सिर्फ एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला अभियान बनकर सामने आया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और संगीत नाटक अकादमी के सेवा संकल्प कार्यक्रम के तहत आयोजित इस नाटक में वंटांगिया कलाकारों ने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता से स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश लोगों के दिलों तक पहुंचाया। स्वच्छता को जीवनशैली बनाने का संदेश नाटक की निर्देशक सुगम सिंह शेखावत ने स्वच्छता को केवल सफाई तक सीमित न रखते हुए उसे सोच, व्यवहार और संस्कृति से जोड़कर पेश किया। नाटक के संवाद और दृश्यों के माध्यम से यह दिखाया गया कि समाज में बदलाव किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि आम लोगों की छोटी-छोटी आदतों से आता है। पानी की बचत, पेड़ लगाना और अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखना- इन्हीं छोटे कदमों से एक स्वच्छ और विकसित भारत की नींव रखी जा सकती है। बच्चों ने लिया स्वच्छता का संकल्प इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव स्कूली बच्चों पर देखने को मिला। बच्चों ने नाटक के हर दृश्य को गंभीरता से देखा और उससे प्रेरित होकर स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। शिक्षकों ने भी माना कि इस तरह के कार्यक्रम किताबों से अलग, व्यवहारिक सीख देने का सबसे असरदार माध्यम हैं, जिससे बच्चों में जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित होती है। जनभागीदारी से मजबूत हुआ संदेश नाटक देखने के लिए स्थानीय लोग, अभिभावक और मीडिया कर्मी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने वंटांगिया कलाकारों की प्रस्तुति की जमकर सराहना की। स्कूल की प्रिंसिपल रेखा मैम ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं और बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी मददगार साबित होते हैं।
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