खाड़ी संकट के बीच भारत का नया तेल साझेदार : वेनेजुएला से बढ़ी नजदीकी, ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा दांव
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के भारत दौरे में कच्चे तेल के व्यापार, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 9 जून 2026
खाड़ी संकट के बीच भारत का नया तेल साझेदार
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत और वेनेजुएला के संबंधों में नई गर्माहट देखने को मिल रही है। दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और कच्चे तेल के व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। इसी उद्देश्य से वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने 3 से 7 जून तक भारत का पांच दिवसीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात कर ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग पर व्यापक चर्चा की।
ऊर्जा सुरक्षा बना मुख्य एजेंडा
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातकों में शामिल है और अपनी जरूरत का अधिकांश तेल विदेशों से खरीदता है। वर्तमान में मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने भारत को तेल आयात के नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। ऐसे समय में वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य केंद्र ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक तेल आपूर्ति सुनिश्चित करना रहा।
भारत से क्या चाहती हैं डेल्सी रोड्रिगेज
कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का प्रमुख उद्देश्य भारत को वेनेजुएला से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना था। वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रही है। भारत जैसे बड़े बाजार में तेल निर्यात बढ़ने से वेनेजुएला को विदेशी मुद्रा आय में उल्लेखनीय वृद्धि मिल सकती है। यही कारण है कि रोड्रिगेज ने अपने दौरे के दौरान ऊर्जा सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
तेजी से बढ़ रही तेल आपूर्ति
समुद्री विश्लेषण संस्था केप्लर के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में वेनेजुएला भारत को प्रतिदिन लगभग 2 लाख 66 हजार बैरल कच्चा तेल भेज रहा था। यह भारत के कुल तेल आयात का करीब 5.3 प्रतिशत हिस्सा था। उस समय रूस, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ब्राजील ही भारत को इससे अधिक तेल की आपूर्ति कर रहे थे। जून 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 4 लाख 27 हजार बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। इसके साथ ही वेनेजुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है।
क्यों बढ़ रही है वेनेजुएला के तेल की मांग
वेनेजुएला के तेल की बढ़ती मांग के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष और संभावित आपूर्ति संकट है। दूसरा कारण वेनेजुएला का अपेक्षाकृत सस्ता भारी कच्चा तेल है, जिसे भारतीय रिफाइनरियां आसानी से प्रोसेस कर सकती हैं। विशेष रूप से रिलायंस जैसी बड़ी भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां इस तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं, जिससे इसकी मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।
कभी भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता था वेनेजुएला
साल 2019 से पहले वेनेजुएला भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक अस्थिरता के चलते भारत को वहां से तेल आयात लगभग बंद करना पड़ा। हाल के वर्षों में परिस्थितियां बदलने लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए समीकरण बनने और ऊर्जा बाजार में बदलाव के कारण भारत और वेनेजुएला के बीच व्यापारिक संबंध फिर मजबूत हो रहे हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार माना जाता है। विभिन्न आकलनों के अनुसार देश में लगभग 303 अरब बैरल तेल का भंडार मौजूद है। यह मात्रा दुनिया के कुल ज्ञात तेल संसाधनों का लगभग 17 प्रतिशत बताई जाती है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों से भी बड़ा माना जाता है। हालांकि वर्षों तक चले आर्थिक संकट, निवेश की कमी और राजनीतिक अस्थिरता के कारण वेनेजुएला अपनी उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाया।
व्यापार से आगे बढ़ेगी साझेदारी
भारत और वेनेजुएला के बीच बातचीत केवल तेल तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने दवा उद्योग, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन, निवेश और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यदि यह साझेदारी आगे बढ़ती है तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत विकल्प मिलेगा, जबकि वेनेजुएला को अपनी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का अवसर प्राप्त होगा।
बदलते वैश्विक समीकरणों में नई रणनीति
मध्य पूर्व में अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी तेल आपूर्ति को विविध बनाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। रूस, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे देशों के साथ बढ़ते संबंध इसी नीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। आने वाले महीनों में भारत और वेनेजुएला के बीच तेल व्यापार में और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है, जो दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।