टेलीग्राम की बढ़ीं मुश्किलें, केंद्र सरकार का सख्त रुख, 15 दिनों में पाइरेटेड फिल्में हटाने का अल्टीमेटम
केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को 15 दिनों के भीतर पाइरेटेड फिल्में और कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने, शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने तथा विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मंच को स्वयं भी ऐसी सामग्री की पहचान कर उसे हटाना होगा।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026
भारत में बढ़ती ऑनलाइन चोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने संदेश साझा करने वाले मंच टेलीग्राम के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपने मंच से पाइरेटेड फिल्मों, धारावाहिकों और अन्य कॉपीराइट सामग्री को हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि केवल शिकायत मिलने के बाद सामग्री हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मंच को स्वयं भी ऐसी सामग्री की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करनी होगी।सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर लगातार बढ़ रही पाइरेसी से फिल्म उद्योग, वेब मंचों, प्रसारण संस्थानों और स्वतंत्र सामग्री निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसी कारण अब सरकार डिजिटल मंचों की जवाबदेही तय करने की दिशा में कठोर कदम उठा रही है ताकि अवैध सामग्री के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
इरेटेड सामग्री की पहचान और तत्काल कार्रवाई के निर्देशपा
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह अपने मंच पर उपलब्ध पाइरेटेड फिल्मों, धारावाहिकों और अन्य कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली सामग्री की पहचान करने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करे। केवल उपयोगकर्ताओं की शिकायत का इंतजार करने के बजाय मंच को स्वयं निगरानी रखनी होगी और संदिग्ध सामग्री को समय रहते हटाना होगा।सरकार का कहना है कि यदि डिजिटल मंच स्वयं सक्रिय होकर अवैध सामग्री पर रोक लगाएंगे, तभी ऑनलाइन पाइरेसी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। इससे मनोरंजन उद्योग और सामग्री निर्माताओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
शिकायत निवारण व्यवस्था की पूरी जानकारी मांगी
मंत्रालय ने टेलीग्राम से उसकी शिकायत निवारण प्रणाली का विस्तृत विवरण भी मांगा है। सरकार जानना चाहती है कि फिल्म निर्माता, वेब मंच, प्रसारण संस्थान, वितरण कंपनियां और कानून लागू करने वाली एजेंसियां किस प्रकार शिकायत दर्ज करा सकती हैं और उन शिकायतों का निस्तारण कितनी अवधि में किया जाता है।सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें शिकायत दर्ज होने के बाद शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित हो और कॉपीराइट उल्लंघन से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान किया जा सके। इससे डिजिटल मंचों की पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।
बार-बार उल्लंघन करने वाले समूहों और संचालकों पर होगी सख्ती
सरकार ने टेलीग्राम को निर्देश दिया है कि केवल व्यक्तिगत खातों तक सीमित कार्रवाई न करते हुए उन सभी समूहों, चैनलों, स्वचालित सेवाओं, संचालकों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर भी कठोर कार्रवाई की जाए जो लगातार पाइरेटेड सामग्री साझा करते हैं।सरकार का मानना है कि केवल एक सामग्री हटाने से समस्या समाप्त नहीं होगी। इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क को समाप्त करना आवश्यक है, ताकि अवैध फिल्मों और धारावाहिकों के प्रसार पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके।
15 दिनों में सौंपनी होगी विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन
सरकार ने टेलीग्राम को 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस प्रतिवेदन में यह बताना होगा कि पाइरेटेड सामग्री की पहचान, रोकथाम और हटाने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है।यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया, तो सरकार मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार इस विषय को लेकर गंभीर रुख अपना चुकी है।
सूचना प्रौद्योगिकी और कॉपीराइट कानून के तहत निभानी होगी जिम्मेदारी
सरकार ने टेलीग्राम को याद दिलाया है कि भारत में मध्यस्थ मंच के रूप में कार्य करने वाले सभी डिजिटल माध्यमों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा वर्ष 2021 के नियमों के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतनी होगी। इसके साथ ही कॉपीराइट कानूनों का पालन सुनिश्चित करना भी उनकी कानूनी जिम्मेदारी है।सरकार का कहना है कि यदि कोई मंच इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए सभी डिजिटल मंचों को अपने तंत्र को और अधिक प्रभावी तथा जवाबदेह बनाना होगा।
रचनाकारों और मनोरंजन उद्योग के हितों की सुरक्षा पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य देश की तेजी से बढ़ती रचनाकार अर्थव्यवस्था, फिल्म उद्योग, वेब मंचों, प्रसारण संस्थानों, फिल्म निर्माताओं और वितरण कंपनियों के हितों की रक्षा करना है। पाइरेटेड सामग्री के कारण इन सभी क्षेत्रों को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।सरकार का मानना है कि यदि डिजिटल मंचों पर अवैध सामग्री की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाता है तो इससे रचनात्मक उद्योग को मजबूती मिलेगी और मौलिक सामग्री तैयार करने वालों को उनका उचित अधिकार एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।