डेंगू की नई वैक्सीन कितनी कारगर

बरसात के मौसम में डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच भारत को पहली बार डेंगू से बचाव के लिए नई वैक्सीन की मंजूरी मिली है। यह वैक्सीन डेंगू के चारों प्रकारों के विरुद्ध सुरक्षा देने का दावा करती है और इसे लगवाने से पहले किसी प्रकार की जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी। विशेषज्ञों के अनुसार इससे गंभीर संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने की संभावना और मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि डेंगू पर पूरी तरह नियंत्रण के लिए टीकाकरण के साथ मच्छरों की रोकथाम, स्वच्छता और समय पर उपचार भी उतना ही आवश्यक रहेगा।

डेंगू की नई वैक्सीन कितनी कारगर

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 21 जुलाई 2026

बरसात का मौसम शुरू होते ही देशभर में डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। हर साल लाखों लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं और हजारों परिवारों को गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। देश को पहली बार डेंगू से बचाव के लिए एक नई वैक्सीन की मंजूरी मिली है। यह वैक्सीन डेंगू के चारों प्रकारों से सुरक्षा देने का दावा करती है और इसे लगवाने से पहले किसी भी प्रकार की जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गंभीर डेंगू, अस्पताल में भर्ती होने की नौबत और मृत्यु के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।


बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा आखिर क्यों बढ़ जाता है

बरसात का मौसम मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है। बारिश के बाद घरों, गलियों, निर्माण स्थलों, खाली प्लॉटों, कूलर, गमलों, टायरों और अन्य खुले बर्तनों में पानी जमा हो जाता है। यही जमा हुआ साफ पानी एडीज़ मच्छर के अंडे देने और तेजी से बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बनता है। यह मच्छर दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है और इसके काटने से डेंगू वायरस इंसानों में फैलता है।भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में मानसून के दौरान डेंगू का प्रकोप तेजी से फैलता है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है और कई बार स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो मरीज की प्लेटलेट तेजी से कम हो सकती है, जिससे जान का खतरा भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ हर वर्ष बरसात शुरू होने से पहले ही लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हैं।


भारत की पहली डेंगू वैक्सीन क्या है और इसे क्यों माना जा रहा है बड़ी उपलब्धि

भारत में मंजूरी प्राप्त यह नई वैक्सीन जापान की दवा निर्माता कंपनी द्वारा विकसित की गई है। यह ऐसी वैक्सीन है जिसमें डेंगू वायरस को कमजोर करके शरीर में पहुंचाया जाता है। कमजोर वायरस बीमारी पैदा नहीं करता, लेकिन शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उसे पहचानकर उसके विरुद्ध मजबूत सुरक्षा तैयार कर लेता है।इस वैक्सीन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जा रही है कि यह डेंगू के केवल एक नहीं बल्कि चारों प्रकार के वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने का दावा करती है। अब तक डेंगू के प्रभावी टीके को लेकर लंबे समय से शोध चल रहे थे। ऐसे में भारत में इस वैक्सीन की मंजूरी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यदि भविष्य में इसका व्यापक स्तर पर उपयोग होता है तो डेंगू के गंभीर मामलों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।


डेंगू के चार प्रकार कौन-कौन से हैं और उनसे सुरक्षा क्यों जरूरी है

डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को एक प्रकार का संक्रमण हो चुका है तो उसके शरीर में केवल उसी प्रकार के वायरस के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। लेकिन भविष्य में यदि दूसरे प्रकार का वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो बीमारी पहले से अधिक गंभीर रूप ले सकती है।इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसी वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रहे थे जो चारों प्रकारों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान कर सके। नई वैक्सीन को इसी कारण अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका उद्देश्य सभी प्रकार के डेंगू वायरस से शरीर को बचाने की क्षमता विकसित करना है। इससे गंभीर डेंगू और जटिलताओं का खतरा कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।


यह वैक्सीन शरीर में कैसे काम करती है

जब किसी व्यक्ति को यह वैक्सीन लगाई जाती है तो उसमें मौजूद कमजोर वायरस शरीर में प्रवेश करता है। शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र इसे बाहरी आक्रमणकारी के रूप में पहचान लेता है और उसके विरुद्ध प्रतिरोधक कोशिकाएं तथा सुरक्षा प्रदान करने वाले तत्व तैयार करने लगता है। इस प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति बीमार नहीं पड़ता क्योंकि वैक्सीन में मौजूद वायरस कमजोर होता है।भविष्य में यदि वास्तविक डेंगू वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा तंत्र पहले से तैयार रहता है और तेजी से संक्रमण से लड़ना शुरू कर देता है। इससे बीमारी गंभीर रूप लेने की संभावना कम हो जाती है। यही कारण है कि वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य संक्रमण को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि उसे जानलेवा बनने से रोकना है।


सबसे बड़ी खासियत क्या है और बिना जांच के टीका लगना क्यों महत्वपूर्ण है

इस वैक्सीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। पहले उपलब्ध कुछ वैक्सीनों के साथ यह जांच अनिवार्य मानी जाती थी क्योंकि कुछ परिस्थितियों में बिना जांच के टीका लगाना जोखिमपूर्ण हो सकता था।नई व्यवस्था के कारण बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाना आसान हो सकता है। भारत जैसे विशाल देश में हर व्यक्ति की पहले जांच करना व्यावहारिक रूप से कठिन होता है। ऐसे में बिना जांच के सुरक्षित रूप से वैक्सीन लगाए जाने की सुविधा इसे अधिक उपयोगी बना सकती है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी लोगों तक टीका पहुंचाना आसान होगा।


किस आयु वर्ग के लोग यह वैक्सीन लगवा सकते हैं और कितनी खुराक दी जाएगी

विशेषज्ञों के अनुसार यह वैक्सीन छह वर्ष से लेकर साठ वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जा सकती है। इसके लिए कुल दो खुराक निर्धारित की गई हैं। पहली खुराक लगाने के लगभग तीन महीने बाद दूसरी खुराक दी जाएगी। दोनों खुराक पूरी होने के बाद शरीर में लंबे समय तक सुरक्षा विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निर्धारित समय पर दोनों खुराक लेना आवश्यक होगा। यदि कोई व्यक्ति केवल पहली खुराक लेकर दूसरी नहीं लगवाता है तो उसे अपेक्षित स्तर की सुरक्षा नहीं मिल पाएगी। इसलिए टीकाकरण की पूरी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी माना जा रहा है।


यह वैक्सीन कितनी प्रभावी मानी जा रही है

उपलब्ध नैदानिक परीक्षणों के अनुसार इस वैक्सीन से डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। इसके साथ ही संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा भी काफी कम पाया गया है। यही कारण है कि चिकित्सा विशेषज्ञ इसे डेंगू नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि कोई भी वैक्सीन शत-प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर को इतना सक्षम बनाना है कि संक्रमण होने की स्थिति में बीमारी गंभीर न हो और मरीज को जानलेवा जटिलताओं का सामना न करना पड़े।


कीमत कितनी हो सकती है और कब तक उपलब्ध होगी

फिलहाल इस वैक्सीन की आधिकारिक कीमत की घोषणा नहीं की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी एक खुराक की कीमत लगभग चार हजार से पांच हजार रुपये के बीच हो सकती है। शुरुआत में यह निजी अस्पतालों और बड़े चिकित्सालयों में उपलब्ध कराई जा सकती है।सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में इसे कब शामिल किया जाएगा, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यदि भविष्य में इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू होता है तो इसकी कीमत कम होने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे अधिक लोगों के लिए इसे प्राप्त करना आसान हो सकेगा।


क्या भारत में ही इसका निर्माण होगा और इससे क्या लाभ मिलेगा

इस वैक्सीन के निर्माण को लेकर भारत की एक प्रमुख औषधि कंपनी के साथ समझौता किया गया है। यदि देश में बड़े स्तर पर इसका उत्पादन शुरू होता है तो भारत को आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे वैक्सीन की उपलब्धता तेजी से बढ़ सकेगी और लागत में भी कमी आने की संभावना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े टीका उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में यदि डेंगू वैक्सीन का निर्माण भी देश में होने लगे तो न केवल घरेलू मांग पूरी होगी बल्कि भविष्य में अन्य देशों को भी इसकी आपूर्ति की जा सकेगी।


क्या अब डेंगू पूरी तरह खत्म हो जाएगा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल वैक्सीन लग जाने से डेंगू पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों की संख्या नियंत्रित करना, साफ-सफाई बनाए रखना, पानी जमा न होने देना और समय पर उपचार कराना आज भी उतना ही आवश्यक रहेगा।वैक्सीन बीमारी को गंभीर होने से रोक सकती है, लेकिन यदि लोग लापरवाही बरतेंगे और मच्छरों की रोकथाम के उपाय नहीं अपनाएंगे तो संक्रमण फैलता रहेगा। इसलिए टीकाकरण के साथ-साथ जनजागरूकता और स्वच्छता अभियान भी समान रूप से जरूरी हैं।


भारत में हर वर्ष डेंगू कितना बड़ा खतरा बन चुका है

राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष २०२३ में देश में दो लाख नवासी हजार से अधिक डेंगू के मामले सामने आए थे और लगभग बारह सौ लोगों की मृत्यु हुई थी। इसके बाद वर्ष २०२४ में मामलों की संख्या तीन लाख से अधिक पहुंच गई तथा मृतकों का आंकड़ा भी बढ़ गया।ये आंकड़े बताते हैं कि डेंगू अब केवल मौसमी बीमारी नहीं रह गई है बल्कि यह देश की सबसे बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुकी है। बदलते मौसम, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलभराव की समस्या के कारण इसका खतरा लगातार बढ़ रहा है।


डेंगू से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, बाल्टी, गमले, टायर और छत पर रखे बर्तनों का पानी समय-समय पर बदलते रहें। पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छरदानी तथा मच्छर भगाने वाले साधनों का नियमित उपयोग करें।यदि तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में तेज दर्द, उल्टी, कमजोरी या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और उपचार से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।