भारत चीन रिश्तों पर बदला बीजिंग का रुख ; सहयोग का संदेश देकर चीन ने दिए नए संकेत

चीन ने भारत को लेकर नरम रुख अपनाते हुए कहा है कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं। बीजिंग ने भारत और चीन को एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर बताते हुए संवाद, विश्वास और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।

भारत चीन रिश्तों पर बदला बीजिंग का रुख ; सहयोग का संदेश देकर चीन ने दिए नए संकेत

दि राइजिंग न्यूज़ | बीजिंग | 9 जून 2026

भारत को लेकर बदले चीन के सुर

भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और सीमा विवादों के बीच चीन ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए दोनों देशों के रिश्तों को नए दृष्टिकोण से देखने की बात कही है। बीजिंग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी या विरोधी ताकतें नहीं हैं, बल्कि सहयोगी साझेदार हैं और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर प्रदान करते हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी इस बयान को दोनों देशों के संबंधों में संभावित सकारात्मक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पुतिन की टिप्पणी के बाद आया बयान

चीन की यह प्रतिक्रिया रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया टिप्पणी के बाद सामने आई है। पुतिन ने भारत और चीन के साथ रूस के मजबूत संबंधों का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते संवाद और सहयोग की सराहना की थी। जब बीजिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान से इस विषय पर सवाल पूछा गया, तब उन्होंने भारत और चीन के संबंधों को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया दी।

सहयोगी साझेदार हैं भारत और चीन

लिन जियान ने कहा कि चीन और भारत को एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धी या खतरे के रूप में नहीं देखना चाहिए। दोनों देशों को सहयोगी साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए और एक-दूसरे के विकास को अवसर मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देशों के बीच स्थिर और सकारात्मक संबंध केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे एशिया और वैश्विक समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

सीमा पर स्थिति स्थिर होने का दावा

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान में भारत-चीन सीमा क्षेत्र में स्थिति सामान्य रूप से स्थिर बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच संवाद और संपर्क के चैनल सुचारु रूप से काम कर रहे हैं। लिन जियान के अनुसार, दोनों देशों को रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाकर संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि दीर्घकालिक स्थिरता और विश्वास का वातावरण मजबूत हो सके।

मतभेदों को संभालने पर जोर

बीजिंग ने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच मौजूद मतभेदों को उचित और शांतिपूर्ण तरीके से संभालना समय की मांग है। चीन का मानना है कि आपसी विश्वास बढ़ाने और सहयोग का दायरा विस्तारित करने से संबंधों में सुधार संभव है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहिए और संवेदनशील मुद्दों पर संवाद जारी रखना चाहिए।

पाकिस्तान को लेकर भी दिया संदेश

भारत द्वारा अक्सर पाकिस्तान और चीन की घनिष्ठ साझेदारी को लेकर व्यक्त की जाने वाली चिंताओं पर भी चीन ने प्रतिक्रिया दी। लिन जियान ने कहा कि चीन भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संवाद बनाए रखने का पक्षधर है। उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों को बातचीत और परामर्श के माध्यम से अपने मतभेद सुलझाने की सलाह दी। चीन ने कहा कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने का इच्छुक है।

भारत चीन रूस त्रिकोण पर भी सकारात्मक संकेत

चीन ने भारत, रूस और चीन के त्रिपक्षीय सहयोग को लेकर भी सकारात्मक रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि तीनों देश उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनके बीच मजबूत संबंध वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि चीन भारत और रूस के साथ संवाद बनाए रखने तथा त्रिपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

पुतिन ने की थी मोदी और जिनपिंग की सराहना

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में भारत और चीन के संबंधों को बहुआयामी और संवेदनशील बताया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच मौजूद मुद्दों को सुलझाने का सबसे बेहतर तरीका आपसी संवाद है और किसी बाहरी शक्ति को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी प्रशंसा करते हुए कहा था कि दोनों नेता सीमा विवाद समेत विभिन्न संवेदनशील मुद्दों के समाधान के लिए प्रयासरत हैं।

बदलते वैश्विक समीकरणों का असर

बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, आर्थिक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन के बीच चीन का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और सबसे अधिक आबादी वाले देशों के बीच यदि सहयोग बढ़ता है तो इसका असर केवल एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल बीजिंग के इस बयान को दोनों देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि वास्तविक प्रगति आने वाले समय में दोनों देशों के व्यवहार और कूटनीतिक कदमों पर निर्भर करेगी।