सेना की ताकत बढ़ाएंगे नए मोर्टार वाहन

भारतीय सेना ने अपनी फायरपावर और युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये आधुनिक वाहन स्वचालित मोर्टार फायरिंग, तेज तैनाती और बेहतर सुरक्षा सुविधाओं से लैस होंगे, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की मारक क्षमता बढ़ेगी।

सेना की ताकत बढ़ाएंगे नए मोर्टार वाहन

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 11 जून 2026

सेना को मिलेंगे अत्याधुनिक मोर्टार वाहन

भारतीय सेना युद्धक्षेत्र में अपनी मारक क्षमता और प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाने के लिए मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इन आधुनिक वाहनों के शामिल होने से मोर्टार फायरिंग अधिक सटीक, तेज और प्रभावी हो सकेगी। साथ ही सैनिकों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण सुधार होगा।

स्वचालित तकनीक से बढ़ेगी सटीकता

वर्तमान मोर्टार प्रणालियों में फायरिंग के लिए काफी हद तक मानवीय गणनाओं और अनुभव पर निर्भर रहना पड़ता है। नए वाहनों में ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर और उन्नत फायर कंट्रोल सिस्टम लगाए जाएंगे, जो लक्ष्य की जानकारी मिलते ही स्वचालित रूप से फायरिंग डेटा तैयार कर देंगे। इससे लक्ष्य पर पहली ही फायरिंग में सटीक प्रहार की संभावना बढ़ जाएगी।

स्वदेशी उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

भारतीय सेना ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत उद्योग जगत से जानकारी आमंत्रित की है। प्रस्तावित वाहन 81 मिमी और 120 मिमी मोर्टार सिस्टम के साथ कार्य करने में सक्षम होंगे। यह पहल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कम समय में फायरिंग की क्षमता

सेना ने इन वाहनों के लिए कई महत्वपूर्ण मानक निर्धारित किए हैं। वाहन को फायरिंग के लिए तैयार होने में लगभग 20 सेकंड लगेंगे, जबकि एक लक्ष्य से दूसरे लक्ष्य पर निशाना साधने में केवल 5 सेकंड का समय लगेगा। इसके अलावा वाहन बड़ी संख्या में मोर्टार गोले ले जाने में सक्षम होगा।

कठिन इलाकों में भी प्रभावी संचालन

नए मोर्टार स्पेशलिस्ट वाहन ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों, रेगिस्तानी इलाकों और अत्यधिक तापमान वाली परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किए जाएंगे। ये वाहन शून्य से काफी नीचे के तापमान से लेकर अत्यधिक गर्म वातावरण तक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। इससे लद्दाख, सियाचिन और राजस्थान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सेना को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

आधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस

युद्धक्षेत्र में बढ़ते ड्रोन और जवाबी हमलों के खतरे को देखते हुए इन वाहनों में बैलिस्टिक सुरक्षा, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और आधुनिक संचार नेटवर्क की सुविधा दी जाएगी। साथ ही इन्हें दुश्मन की निगरानी और हमलों से बचाव के लिए उन्नत तकनीकों से लैस किया जाएगा।

सीमा क्षेत्रों में होगी तैनाती

सेना की योजना इन वाहनों को मुख्य रूप से पाकिस्तान और चीन से लगती सीमाओं पर तैनात करने की है। उच्च ऊंचाई वाले इलाकों और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में ये वाहन पैदल सेना को तेज और प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध कराएंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय सेना की सामरिक क्षमता और युद्धक्षेत्र में प्रतिक्रिया शक्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।