90% मुस्लिम देश, फिर भी रामायण-महाभारत का सम्मान
इंडोनेशिया, नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया दौरा, रामायण, महाभारत, हिंदू संस्कृति, बाली, मुस्लिम बहुल देश, भारत-इंडोनेशिया संबंध, प्रम्बानन मंदिर, भारतीय संस्कृति, बहासा इंडोनेशिया, धार्मिक स्वतंत्रता
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 6 जुलाई 2026
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे हैं। यह यात्रा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दोनों देशों के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को भी नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश के रूप में पहचान रखने वाला इंडोनेशिया आज भी भारतीय संस्कृति, रामायण और महाभारत जैसी महान परंपराओं को सम्मान के साथ अपने सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाए हुए है।
भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता हजारों वर्षों पुराना
भारत और इंडोनेशिया के संबंध आधुनिक समय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी नींव प्राचीन काल में ही पड़ चुकी थी। ईसा पूर्व के समय से भारतीय व्यापारी, समुद्री यात्री और संत इंडोनेशिया पहुंचते रहे, जिसके कारण वहां भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं का व्यापक प्रभाव दिखाई देने लगा। समय के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने इस रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाया। यही कारण है कि आज भी इंडोनेशिया की संस्कृति में भारतीय सभ्यता की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।
प्राचीन साम्राज्यों में दिखती है भारतीय सभ्यता की छाप
इंडोनेशिया के इतिहास में श्रीविजय, मजापहित और अन्य शक्तिशाली साम्राज्यों का विशेष स्थान रहा है। इन राजवंशों पर हिंदू और बौद्ध परंपराओं का गहरा प्रभाव था, जिसकी झलक वहां के मंदिरों, स्थापत्य कला, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक अभिलेखों में स्पष्ट दिखाई देती है। इन साम्राज्यों के शासनकाल में भारतीय संस्कृति का व्यापक विस्तार हुआ और अनेक धार्मिक परंपराएं स्थानीय समाज का हिस्सा बन गईं। आज भी यह विरासत इंडोनेशिया की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।
बहासा इंडोनेशिया में आज भी मौजूद हैं संस्कृत के हजारों शब्द
इंडोनेशिया की आधिकारिक भाषा बहासा इंडोनेशिया में संस्कृत के अनेक शब्द आज भी प्रचलन में हैं। प्रशासन, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन में उपयोग होने वाले कई शब्द भारतीय मूल से जुड़े हुए हैं। यह भाषाई समानता दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की मजबूत गवाही देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सदियों पहले हुए सांस्कृतिक संपर्क का प्रभाव आज भी इंडोनेशिया की भाषा और परंपराओं में सुरक्षित है।
रामायण और महाभारत को अपनी सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं इंडोनेशियाई
इंडोनेशिया में रामायण और महाभारत को केवल धार्मिक ग्रंथों के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जाता है। इन महाकाव्यों के पात्र, कथाएं और आदर्श वहां की लोककला, नृत्य, संगीत और पारंपरिक रंगमंच का अभिन्न हिस्सा हैं। राम, सीता, हनुमान, अर्जुन और कौरव-पांडव जैसे पात्रों पर आधारित प्रस्तुतियां पूरे देश में लोकप्रिय हैं। स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ कथाओं में बदलाव अवश्य हुआ है, लेकिन मूल संदेश और सांस्कृतिक महत्व आज भी कायम है।
रामलीला और कठपुतली नाटकों में जीवंत होती है भारतीय परंपरा
इंडोनेशिया में रामायण पर आधारित नृत्य नाटिकाएं और कठपुतली प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र होती हैं। दशहरा से पहले आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकार भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन करते हैं। इन आयोजनों की सबसे खास बात यह है कि इनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के कलाकार समान उत्साह के साथ भाग लेते हैं। यही सांस्कृतिक समरसता इंडोनेशिया की बहुलतावादी परंपरा को मजबूत बनाती है।
बाली आज भी हिंदू संस्कृति का प्रमुख केंद्र
इंडोनेशिया के बाली द्वीप को हिंदू संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां की अधिकांश आबादी हिंदू धर्म का पालन करती है और पारंपरिक रीति-रिवाजों का संरक्षण करती है। बाली के प्रसिद्ध मंदिर, धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक उत्सव दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। भारत से भी हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बाली पहुंचते हैं, जहां उन्हें भारतीय संस्कृति से जुड़ी अनेक परंपराएं देखने को मिलती हैं।
अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिंदुओं को प्राप्त है धार्मिक स्वतंत्रता
पूरे इंडोनेशिया में हिंदुओं की आबादी लगभग दो प्रतिशत के आसपास है, लेकिन उन्हें संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है। सरकार विभिन्न धार्मिक समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान देती है। रामायण और महाभारत पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन भी सरकारी और सांस्कृतिक संस्थानों के सहयोग से किया जाता है। यही कारण है कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत आज भी वहां सम्मानपूर्वक संरक्षित है।
प्रम्बानन मंदिर और सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा भारत वर्ष 2027 में गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की इंडोनेशिया यात्रा की शताब्दी भी मनाएगा। दोनों देशों का मानना है कि सांस्कृतिक विरासत भविष्य में भी भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई दिशा देने का काम करेगी।