एथेनॉल मिश्रित ईंधन से इंजन होगा खराब या मिलेगा फायदा
एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर फैल रहे भ्रम पर केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर जवाब दिया है। जानिए इंजन, वाहन की औसत, पर्यावरण और किसानों पर इसके प्रभाव से जुड़ी पूरी जानकारी।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 3 जुलाई 2026
देशभर में एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं। कहीं इंजन खराब होने का दावा किया जा रहा है तो कहीं वाहन की औसत कम होने और पेट्रोल टैंक पर चींटियां व मधुमक्खियां जमा होने की बातें कही जा रही हैं। इन सभी दावों पर केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक परीक्षणों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है।
एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर सरकार का जवाब
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन कोई नया प्रयोग नहीं है। अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, जापान सहित अनेक विकसित देशों में वर्षों से इसका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। भारत ने भी दिसंबर 2025 तक पेट्रोल में बीस प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। सरकार का दावा है कि इस ईंधन को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे अधिकांश दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
क्या एथेनॉल मिश्रित ईंधन से इंजन खराब हो जाता है
सरकार के अनुसार इस विषय पर देश की प्रमुख अनुसंधान और वाहन निर्माण संस्थाओं द्वारा व्यापक परीक्षण किए गए हैं। चार पहिया वाहनों को लगभग चालीस हजार किलोमीटर और दोपहिया वाहनों को लगभग बीस हजार किलोमीटर तक चलाकर जांच की गई। परीक्षण के दौरान इंजन, स्टार्ट होने की क्षमता, प्रदर्शन और अधिकांश पुर्जों में कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई। केवल कुछ पुराने वाहनों में रबर के कुछ हिस्सों को अपेक्षाकृत जल्दी बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
क्या वाहन की औसत कम हो जाती है
सरकार ने स्वीकार किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से कुछ परिस्थितियों में औसत में हल्की कमी आ सकती है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि वाहन की औसत केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि चालक की शैली, सड़क की स्थिति, यातायात, टायरों का दबाव और नियमित रखरखाव भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार का दावा है कि इसके बदले इंजन का प्रदर्शन बेहतर होता है और प्रदूषण में कमी आती है।
चींटियां और मधुमक्खियां जमा होने के दावों की सच्चाई
सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो प्रसारित किए गए जिनमें दावा किया गया कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण पेट्रोल टैंक पर चींटियां और मधुमक्खियां जमा हो रही हैं। इस पर भारत पेट्रोलियम निगम का कहना है कि ईंधन में प्रयुक्त एथेनॉल में किसी प्रकार की शर्करा नहीं होती। इसमें ऐसे रासायनिक तत्व मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को आकर्षित नहीं होने देते। इसलिए ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
सरकार ने गिनाए एथेनॉल मिश्रण के बड़े लाभ
केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण देश को लगभग एक लाख नब्बे हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। किसानों को एक लाख साठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है तथा कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी घटी है। सरकार का कहना है कि यह योजना ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।
औसत में कमी को लेकर पहली बार सरकार ने क्या माना
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहली बार स्वीकार किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कुछ परिस्थितियों में वाहन की औसत में मामूली कमी आ सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसकी भरपाई इंजन की बेहतर कार्यक्षमता, कम नॉकिंग और बेहतर त्वरण के रूप में होती है। सरकार का कहना है कि केवल औसत के आधार पर इस ईंधन का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा।
रेसिंग कारों का उदाहरण कितना उचित है
सरकार ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन के समर्थन में रेसिंग कारों का उदाहरण दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों की तुलना पूरी तरह उचित नहीं है। रेसिंग कारों में सामान्य वाहनों से अलग प्रकार का ईंधन और विशेष रूप से तैयार इंजन उपयोग किए जाते हैं। वहीं आम लोगों के वाहन रोजमर्रा के उपयोग के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए दोनों के प्रदर्शन की सीधी तुलना तकनीकी रूप से सही नहीं मानी जाती।
आगे की योजना क्या है
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से वाहन बीमा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाकर पच्चीस प्रतिशत करने पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। साथ ही वाहन निर्माता कंपनियों और विशेषज्ञ संस्थाओं से सलाह लेने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।