दि राइजिंग न्यूज़ डेस्क | 22 अप्रैल 2026 ।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम बढ़ाने के फैसले को ईरान ने खारिज करते हुए इसे “नई रणनीतिक चाल” बताया है।
ईरान का कड़ा रुख
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ के करीबी सलाहकार ने कहा कि यह कदम शांति स्थापित करने के बजाय संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी जैसा लगता है।
उनका कहना है कि ईरानी बंदरगाहों पर जारी नाकाबंदी सीधे तौर पर उकसावे की कार्रवाई है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ईरान का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम उसकी संप्रभुता पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश है, जिससे देश के भीतर सख्त प्रतिक्रिया की मांग बढ़ गई है।
युद्धविराम के साथ दबाव की नीति
अमेरिका ने एक ओर युद्धविराम बढ़ाने का फैसला लिया है, वहीं दूसरी ओर ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान बातचीत के लिए स्पष्ट और संयुक्त प्रस्ताव नहीं देता, तब तक यह दबाव नीति जारी रहेगी।
इसी कारण यह स्थिति “शांति और दबाव” दोनों के बीच उलझती नजर आ रही है।
पाकिस्तान का जिक्र और कूटनीतिक उलझन
अमेरिका ने अपने फैसले के पीछे पाकिस्तान के अनुरोध और ईरान के अंदर राजनीतिक मतभेदों का हवाला दिया है।
अमेरिकी दावे के अनुसार, ईरान के भीतर एकजुटता की कमी है, इसलिए बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दबाव जरूरी है।
हालांकि, इस बयान के बाद कूटनीतिक हालात और अधिक जटिल हो गए हैं और वार्ता की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
ईरान की शर्त और सख्त चेतावनी
ईरान ने साफ कहा है कि किसी भी बातचीत से पहले अमेरिका को नाकाबंदी हटानी होगी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि यह नाकाबंदी खुद युद्धविराम का उल्लंघन है और इसे युद्ध जैसा कदम माना जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक व्यापारिक जहाज पर हमला और उसके चालक दल को बंधक बनाए जाने की घटना स्थिति को और गंभीर बनाती है।
बढ़ते तनाव के संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर नाकाबंदी नहीं हटाई गई और दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े रहे, तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिर दौर से गुजर रहा है, और यह नया टकराव क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है।
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास गहरा होता जा रहा है। एक तरफ अमेरिका दबाव की नीति पर कायम है, वहीं दूसरी तरफ ईरान इसे सीधा हमला और संप्रभुता का उल्लंघन मान रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीति आगे बढ़ती है या तनाव और अधिक भड़कता है।