ज्वेल कारपेट बनाने में लगते हैं डेढ़ महीने:तांबे पर चढ़ता है सोने का पानी, आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट स्टॉल पर दिखा हाथ का हुनर
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश की आधुनिक इंडस्ट्री के साथ पारंपरिक हुनर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट स्टॉल पर हाथों से तैयार की जा रही पुरानी कला को प्रदर्शित किया गया है। यहां रखे एक-एक पीस में कारीगरों की महीनों की मेहनत दिखाई देती है। आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट से जुड़े रेहान अहमद ने बताया कि यह उनके यहां पीढ़ियों से चली आ रही हैंड वर्क कला है। एक पीस तैयार करने में दो कारीगर लगातार काम करते हैं और इसे पूरा होने में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लगता है।
नक्शी, टपका और कोरा से तैयार होता है डिजाइन
रेहान के मुताबिक इस काम में नक्शी, टपका और कोरा जैसे मटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है। जिस पीस को वह ट्रेड शो में प्रदर्शित कर रहे हैं, उसमें तांबे का इस्तेमाल किया गया है। इसके ऊपर सोने का पानी चढ़ाया जाता है। जिससे तैयार उत्पाद को अलग लुक मिलता है। दो कारपेट को जोड़ने के काम आती है ज्वेल कारपेट
स्टॉल पर प्रदर्शित खास उत्पाद ज्वेल कारपेट है। इसका इस्तेमाल दो कारपेट को आपस में सटाने या जोड़ने के लिए किया जाता है। रेहान बताते हैं कि एक मीटर का पीस तैयार करने में भी दो कारीगरों को लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंच पर आगरा की इस पुरानी हस्तकला को प्रदर्शित करना जरूरी है। इससे पारंपरिक काम को नए खरीदारों और दूसरे बाजारों तक पहुंचाने का मौका मिलता है। इस बार हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और टेक्सटाइल को भी प्रमुख फोकस सेक्टर में रखा गया है।
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