कानपुर में रेलवे पटरी किनारे 700 घरों पर संकट:रेलवे ने 15 दिन दिए खाली करने के लिए, बच्चे बोले-घर नहीं रहेगा तो पढ़ाई कैसे करेंगे
कानपुर के कैंट विधानसभा क्षेत्र में रेलवे पटरी किनारे बसे करीब 700 कच्चे मकानों पर बेघर होने का संकट गहरा गया है। संजय नगर, कैंट-72 और गेट नंबर-42 के आसपास नाले के निर्माण के लिए रेलवे की ओर से इन मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। तीन बार नोटिस दिए जाने के बाद गुरुवार को रेलवे की टीम दो बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची तो इलाके में हड़कंप मच गया। शनिवार को दैनिक भास्कर टीम ने लोगों के बीच जाकर ख़ास बातचीत की। शुरुआत में करीब छह मकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी थी, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और विरोध शुरू कर दिया। विरोध के बीच सपा विधायक हसन रूमी, भाजपा के पूर्व विधायक रघुनंदन भदौरिया समेत कई कार्यकर्ता भी वहां पहुंचे और लोगों के पक्ष में आवाज उठाई। माहौल गरमाने के बाद रेलवे टीम को कार्रवाई रोककर लौटना पड़ा। लोगों को 15 दिन के भीतर अपने स्तर से मकान खाली करने का समय दिया गया है। हालांकि, 15 दिन की यह मोहलत यहां रहने वाले परिवारों की चिंता कम करने के बजाय उनके सामने एक बड़ा सवाल छोड़ गई है आखिर जाएंगे कहां? 700 घर, हजारों जिंदगियां और उजड़ने का डर - रेलवे किनारे बसे इस इलाके में करीब 700 परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां दो मंदिर हैं और आबादी में करीब 70 प्रतिशत हिंदू तथा 30 प्रतिशत मुस्लिम परिवार हैं। अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इलाके के करीब 90 प्रतिशत पुरुष रिक्शा चलाने या दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। वहीं लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं आसपास के घरों में चौका-बर्तन कर परिवार का खर्च चलाती हैं। यहां 1,500 से अधिक बच्चे भी रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ती है। इसके अलावा इस क्षेत्र में 2 मंदिर भी है। बुलडोजर देखकर सहम गए बच्चे, बोले.. घर नहीं रहेगा तो पढ़ाई कैसे करेंगे
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