कानपुर विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा उत्सव:कवि सम्मेलन में कवियों ने देशभक्ति हास्य शृंगार रचनाएं प्रस्तुत कीं

Sep 30, 2026 - 20:33
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कानपुर विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा उत्सव:कवि सम्मेलन में कवियों ने देशभक्ति हास्य शृंगार रचनाएं प्रस्तुत कीं
कानपुर में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के तत्वावधान में हिंदी भाषा उत्सव-2026 के तहत वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की प्रेरणा से आयोजित हुआ। भाषा संकाय के निदेशक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन दिया। मंच संचालन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने किया, जबकि काव्य पाठ का संचालन डॉ. कुमार मनोज ने किया। कार्यक्रम में आमंत्रित कवियों का अंगवस्त्र और तुलसी पादप देकर सम्मान किया गया। काव्य पाठ की शुरुआत योगिता चौहान ने की। सुश्री प्रीति अग्रवाल ने शृंगार और देशभक्ति की कविताएं प्रस्तुत कीं। प्रमोद पंकज ने बढ़ती महंगाई पर हास्य-व्यंग्य के माध्यम से कटाक्ष किया। सुश्री व्यंजना शुक्ला ने प्रेम पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं। श्री सुरेश अलबेला ने हास्य-व्यंग्य की रचनाओं के साथ राम नाम का उद्घोष किया। इस दौरान कवियों ने अपनी रचनाओं की पंक्तियां भी प्रस्तुत कीं। व्यंजना शुक्ला ने कहा, "इक शाम मोहब्बत की तकदीर से मिलती है।" सुरेश अलबेला ने पढ़ा, "काल के कपाल का मैं भक्त महाकाल का।" प्रमोद पंकज ने कहा, "शब्द गढ़ते तो तुलसी के पुजारी बन गए होते, सूर के तट के पुजारी बन गए होते।" प्रीति अग्रवाल ने देशभक्ति की कविता में कहा, "मैं रानी लक्ष्मीबाई के तेवर पर अभिमान करूंगी, देशभक्त परिपाटी से हूं, देशभक्ति का गान करूंगी।" योगिता चौहान ने शृंगार रस की पंक्तियां प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में सुरेश अलबेला, डॉ. कुमार मनोज, प्रमोद पंकज, ज्योति चौहान, प्रीति अग्रवाल और व्यंजना शुक्ला सहित अन्य कवि मौजूद रहे।

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