खनन विभाग के पोर्टल में सेंध लगाकर बनाया फर्जी लाइसेंस:76 वाहनों के काटे ई-फॉर्म-सी, रिकॉर्ड में लाइसेंस की मंजूरी ही नहीं; 1900 घनमीटर गिट्टी दर्ज

Sep 28, 2026 - 18:30
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खनन विभाग के पोर्टल में सेंध लगाकर बनाया फर्जी लाइसेंस:76 वाहनों के काटे ई-फॉर्म-सी, रिकॉर्ड में लाइसेंस की मंजूरी ही नहीं; 1900 घनमीटर गिट्टी दर्ज
मुजफ्फरनगर में खनन विभाग के सरकारी पोर्टल में सेंध लगाकर फर्जी लाइसेंस आईडी बनाने का मामला सामने आया है। इस आईडी से 76 वाहनों के लिए ई-फॉर्म-सी जारी किए गए। इनमें करीब 1900 घनमीटर सैंड स्टोन/क्वार्टजाइट बैलास्ट यानी गिट्टी दर्ज की गई थी। हैरानी की बात यह है कि विभाग के रिकॉर्ड में इस लाइसेंस को कोई मंजूरी ही नहीं दी गई थी। मामला 21 सितंबर की शाम सामने आया। खनन विभाग के वीटीएस-डीजीएम एप पर मुजफ्फरनगर से ई-फॉर्म-सी जारी होते दिखाई दिए। अधिकारियों ने जांच की तो पता चला कि जिले में ऐसा कोई भंडारण लाइसेंस स्वीकृत ही नहीं है। इसके बाद लखनऊ स्थित भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय को मामले की जानकारी दी गई। शाना अहमद के नाम पर बनी लाइसेंस आईडी जांच में सामने आया कि लाइसेंस आईडी 31142603990001 से लगातार ई-फॉर्म-सी जारी किए गए थे। पोर्टल पर लाइसेंसधारी का नाम शाना अहमद पुत्र अनवर और पता अहमदगढ़, मुजफ्फरनगर दर्ज था। भंडारण स्थल के रूप में खतौली तहसील के अहमदगढ़ गांव की जमीन दिखाई गई थी। विभागीय रिकॉर्ड खंगालने पर इस लाइसेंस की कोई स्वीकृति नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने फर्जी लाइसेंस आईडी को ब्लॉक कर दिया। जांच में पता चला कि इसी आईडी से 76 वाहनों के ई-फॉर्म-सी जारी किए गए थे। इन फॉर्म में करीब 1900 घनमीटर सैंड स्टोन/क्वार्टजाइट बैलास्ट यानी गिट्टी दर्ज थी। 40 घंटे की वैधता, 20 घंटे में कैंसिल किए फॉर्म खनन अधिकारी आशुतोष कुमार ने सोमवार शाम करीब 4 बजे बताया कि मुजफ्फरनगर में गिट्टी का कोई वैध भंडारण कार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि ई-फॉर्म-सी करीब 40 घंटे तक वैध रहते हैं। फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही करीब 20 घंटे के भीतर सभी संबंधित फॉर्म कैंसिल कर दिए गए। OTP की जगह सिर्फ पासवर्ड से खुल रहा था पोर्टल दर्ज शिकायत के मुताबिक, पहले पोर्टल पर लॉगिन के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड डालने के बाद मोबाइल पर ओटीपी आता था। ओटीपी डालने के बाद ही पोर्टल खुलता था। लेकिन कुछ समय से तकनीकी समस्या के कारण ओटीपी नहीं आ रहा था। ऐसे में केवल यूजर आईडी और पासवर्ड डालने पर ही पोर्टल खुल जा रहा था। विभाग को शक है कि इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर किसी ने खनन अधिकारी की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल किया और फर्जी लाइसेंस आईडी बनाकर ई-फॉर्म-सी जारी कर दिए। लाइसेंस में दर्ज नंबर पर महिला ने उठाया फोन जांच के दौरान विभाग ने फर्जी लाइसेंस में दर्ज मोबाइल नंबर पर फोन किया। फोन एक महिला ने उठाया। उसने बताया कि मोबाइल नंबर उसके पति जुनैद के नाम पर है और उसे लाइसेंस के बारे में कोई जानकारी नहीं है। IT Act समेत धाराओं में मुकदमा खनन अधिकारी की तहरीर पर सिविल लाइन थाने में BNS की धारा 318(4) और IT Act की धारा 66C व 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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