कलेक्ट्रेट में प्रतिबंधित मांझे से कबूतर की मौत:रामपुर प्रशासन ने जेसीबी-क्रेन से बचाने की कोशिश की
रामपुर। जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे प्रतिबंधित मांझे में फंसे एक कबूतर की दर्दनाक मौत हो गई। कबूतर को बचाने के लिए प्रशासन ने जेसीबी और बड़ी क्रेन मंगाई, लेकिन बचाव दल के पहुंचने तक बेजुबान पक्षी दम तोड़ चुका था। घटना अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के ठीक सामने हुई। अधिवक्ता सुधीर शर्मा ने बताया कि एक जंगली कबूतर प्रतिबंधित मांझे में बुरी तरह उलझ गया था। मांझे में फंसने के बाद वह काफी देर तक छटपटाता और फड़फड़ाता रहा। जान बचाने के लिए उसने खुद को छुड़ाने की काफी कोशिश की, लेकिन इस दौरान मांझा उसके शरीर में और अधिक कसता चला गया। कुछ ही देर में उसकी हालत गंभीर हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने कबूतर को बचाने के लिए प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद उसे नीचे उतारकर सुरक्षित बचाने के लिए जेसीबी और बड़ी क्रेन मंगाई गई। प्रशासनिक अमला बचाव की तैयारी कर ही रहा था, लेकिन तब तक कबूतर की सांसें थम चुकी थीं। बेजुबान पक्षी को बचाने की कोशिश हुई, मगर समय पर मदद नहीं पहुंच पाने से उसकी जान नहीं बच सकी। सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रतिबंधित मांझा केवल पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। आए दिन इसके कारण लोग घायल होते हैं और कई घटनाओं में लोगों की जान तक जा चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाकर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर कार्रवाई करता है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिबंधित मांझे पर पूरी तरह पाबंदी सुनिश्चित हो और इसकी बिक्री करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो तो इंसानों के साथ बेजुबान पक्षियों की जान भी बचाई जा सकती है। अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने कहा कि प्रतिबंधित मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है।
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