कुशीनगर में बांध टूटा, सांसद ने अफसरों को फटकारा:बचाने की लिए पर्याप्त इंतजाम न देख भड़के सशांक मणि त्रिपाठी, बोले- अफसर लापरवाह
कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में एपी तटबंध पर नारायणी नदी के पानी के दबाव से सौ मीटर से अधिक के कटे हिस्से से अभी भी तेज पानी का बहाव जारी है, जिसके कारण लाखों की आबादी सीधे प्रभावित हुई है। इसी बीच मंगलवार को सीएम के जाने के बाद क्षेत्र में लगातार कैम्प कर रहे क्षेत्रीय देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी का रात के अंधेरे में बंधे पर ही अधिकारियों से बातचीत का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वो बांध टूटने की घटना से लेकर वर्तमान की व्यवस्था पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते नजर आ रहे हैं। बीते सोमवार की रात जिले के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में अहिरौलिदान–पिपरासी तटबंध पर एक स्थान पर रिसाव शुरू हुआ, जो देखते देखते कुछ ही देर में भयावह हो गया । वर्तमान में वो टूटा हिस्सा 100 मीटर से काफी अधिक हो चुका है । आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में भगदड़ की स्थिति बन गई और लोग अपने घर के आवश्यक सामानों को बंधे पर ले जाने में लग गए । मामले में खास बात यह है कि कटान स्थल के आसपास मौके पर कहीं भी कोई भी ऐसी बचाव सामग्री जैसे जाल में रखे बोल्डर, बालू भरे बोरे ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसे कटाव स्थल पर डालकर पानी के बहाव को रोका जा सके । वैसे दिखावे के लिए विभागीय अधिकारियों ने रात के अंधेरे में जेसीबी आदि लगाकर काफी कुछ किया लेकिन वही हुआ जिसका अनुमान ग्रामीणों को था । बंधे का टूटा गैप प्रतिक्षण बढ़ता गया, और अगले दिन जब तक मुख्यमंत्री पहुंचे तक वो गैप 60–70 मीटर तक पहुंच गया । बता दें कि घटनाक्रम के कुछ घंटे बाद ही सीएम के आने से मात्र यही हुआ कि राहत सामग्री बाँटने के कार्य में थोड़ी तेजी जरूर आ गई और साथ ही जिन राजनेताओं या अधिकारियों की उपस्थिति बाढ़ क्षेत्र में दर्ज नहीं हो पाई थी, वो सभी मौके पर पहुंच गए । सीएम के जाने के बाद से ही लगातार क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले क्षेत्रीय सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने अपने वायरल वीडियो के जवाब में दैनिक भास्कर से साफ कहा कि किसी जाँच के पहले मै किसी को आरोपित तो नहीं करूंगा लेकिन लापरवाही तो हुई है। उन्होंने कहा कि बांध के टूटे गैप को कैसे भरा जाए, इसके बारे में उच्च स्तरीय समीक्षा हो रही है । उन्होंने बताया कि आज ही इस संदर्भ में जिले के पथिक निवास में एक बैठक भी अधिकारियों के साथ मै करने जा रहा हूं। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि कटान स्थल पर बिना काम किए आगे के राहत कार्यों को अच्छे से नहीं कराया जा सकता है। आरोप प्रत्यारोप के बीच अब यह तो साफ हो गया है कि बाढ़ खण्ड के जिम्मेदारों को जो करना चाहिए था, उन्होंने समय से उसको मौके से नहीं पूरा किया, जिस कारण आज लाखों की संख्या में लोगों को उसका परिणाम भोगना पड़ रहा है।
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