ममता का बड़ा बयान, चुनाव चिह्न छिना तो बोलीं- ‘काला दिन’
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न विवाद में निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया है। फैसले के बाद ममता बनर्जी ने इसे लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताया और आयोग के फैसले पर सवाल उठाए।
दि राइजिंग न्यूज | कोलकाता | 18 सितंबर 2026
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए लागू की गई है।
ममता बनर्जी ने फैसले को बताया काला दिन
निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद का वह सम्मान करती हैं, लेकिन उनके अनुसार यह दिन देश के लोकतांत्रिक इतिहास में काला दिन है। ममता ने आयोग के फैसले को गैर-कानूनी, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई एक राजनीतिक दल को निशाना बनाकर की गई है। ये आरोप ममता बनर्जी के हैं और स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
बीजेपी पर लगाया वोट चोरी का आरोप
ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में वोट चोरी की गई है। उन्होंने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी पर लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों को ममता बनर्जी के राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए और संबंधित राज्यों में वोट चोरी के आरोपों के संबंध में अलग-अलग चुनावी एवं कानूनी प्रक्रियाएं मौजूद हैं।
ममता बोलीं- न सिर झुकाएंगे, न हार मानेंगे
ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले के बाद भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने अपने समर्थकों से जुड़े राजनीतिक संघर्ष को जारी रखने की बात कही और कहा कि वह हार नहीं मानेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को भी पार्टी और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद का सामना करना पड़ा था। ममता ने दावा किया कि विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने उन्हें इस घटनाक्रम के बाद समर्थन दिया है।
पार्टी के पुराने नाम और चिह्न पर लगी रोक
यह पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों को पुराने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया। आयोग ने दोनों पक्षों के बीच नेतृत्व और संगठन से जुड़े विवाद के बीच यह अंतरिम व्यवस्था लागू की। इसके बाद दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा गया था।
ममता गुट को मिला फुटबॉल खिलाड़ी का चिह्न
निर्वाचन आयोग के नए फैसले के अनुसार ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इस गुट को चुनाव लड़ने के लिए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। आयोग ने इस गुट को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देने की जानकारी भी सामने आई है।
दूसरे गुट को मिला लिफाफा चुनाव चिह्न
दूसरे गुट को ‘डेमोक्रैटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और उसके लिए ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न निर्धारित किया गया है। ताजा रिपोर्टों में इस गुट का नेतृत्व अरूप रॉय से जुड़ा बताया गया है, जबकि उपलब्ध मूल खबर में ऋतब्रत बनर्जी का उल्लेख है। दोनों पक्षों के बीच संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अब निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है।
आगामी उपचुनावों पर पड़ेगा सीधा असर
नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने का असर आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों पर पड़ेगा। निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के तहत दोनों गुट अपने नए नाम और चिह्न के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ सकेंगे। रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से पहले यह व्यवस्था की गई है। इससे उम्मीदवारों के नामांकन और चुनावी पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
ममता ने कहा- तृणमूल कांग्रेस को नहीं छोड़ सकती
ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस से अलग नहीं हो सकतीं। उन्होंने पुराने पार्टी नाम और संगठन से अपने लंबे राजनीतिक संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस राजनीतिक संघर्ष का सामना करेंगी। उन्होंने विपक्षी दलों के साथ एकजुटता की भी बात कही। हालांकि, उनके बयान में व्यक्त राजनीतिक अपील और आरोप उनके व्यक्तिगत राजनीतिक वक्तव्य हैं, जिन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
आगे भी जारी रह सकता है नाम और चिह्न का विवाद
निर्वाचन आयोग का मौजूदा फैसला दोनों गुटों को आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिए अलग-अलग पहचान देता है, लेकिन मूल संगठन और स्थायी चुनाव चिह्न से जुड़ा विवाद व्यापक कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया का विषय बना हुआ है। आयोग ने दोनों पक्षों को अलग पहचान देकर तत्काल चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की है। ऐसे में आने वाले समय में इस विवाद से जुड़े अन्य कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
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