मेरठ में रूसी लोकगीतों से सजा CCSU का मंच:‘रशियन पैटर्न्स’ महोत्सव शुरू, मिनिन यूनिवर्सिटी के कलाकारों ने दिखाई रूस की लोकसंस्कृति की झलक

Sep 29, 2026 - 18:30
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मेरठ में रूसी लोकगीतों से सजा CCSU का मंच:‘रशियन पैटर्न्स’ महोत्सव शुरू, मिनिन यूनिवर्सिटी के कलाकारों ने दिखाई रूस की लोकसंस्कृति की झलक
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मंगलवार को रूस की लोकसंस्कृति, संगीत और परंपराओं की झलक देखने को मिली। तीन दिवसीय ‘रशियन पैटर्न्स’ महोत्सव की शुरुआत भारत और रूस के राष्ट्रगान के साथ हुई। रूस की कोज्मा मिनिन निज़नी नोवगोरोड स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी से आए कलाकारों ने लोकगीतों और नृत्यों की प्रस्तुतियां देकर छात्रों को रूसी संस्कृति से रूबरू कराया। महोत्सव का उद्घाटन CCSU की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला और मिनिन यूनिवर्सिटी की उप-कुलपति समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में रूस से आए प्रोफेसर, कलाकार और प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा। आयोजन ‘माई हिस्ट्री’ फाउंडेशन और मिनिन यूनिवर्सिटी की ओर से किया जा रहा है। रूस से आईं एल.वी. एरुश्किना ने विश्वविद्यालय के सहयोग और आतिथ्य के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति समझने का अवसर देते हैं। वहीं कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि किसी देश को केवल किताबों से समझना पर्याप्त नहीं है। उसकी भाषा, साहित्य, संगीत, कला और परंपराओं को करीब से जानना भी जरूरी है। ‘रशियन पैटर्न्स’ के जरिए विद्यार्थियों को रूस की संस्कृति को करीब से समझने का मौका मिल रहा है। ‘कालिंका’ और ‘रशियन बूट्स’ पर खूब बजी तालियां सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत ‘डाउन द वोल्गा रिवर’ रूसी लोकगीत से हुई। इसके बाद ‘यंग लेडीज एंड द हूलिगन’ नृत्य और ‘गोल्डन-डोम्ड मॉस्को’ गीत पेश किया गया। कलाकारों ने पारंपरिक परिधान में नृत्य कर रूस के लोकजीवन की झलक दिखाई। ‘रशियन बूट्स’ और प्रसिद्ध ‘कालिंका’ नृत्य की प्रस्तुति पर सभागार में खूब तालियां बजीं। इसके बाद ‘आई विल स्टेप आउट इनटू द स्ट्रीट’ और ‘माई जॉय लिव्स देयर’ जैसे गीत पेश किए गए। कलाकारों ने डफ/टैम्बरीन, लकड़ी के चम्मच और बालालाइका जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का भी इस्तेमाल किया। कार्यक्रम में ‘बारिन्या’, ‘काक जा दोनॉम’, ‘रज़ वेचोर’ और ‘आ या पो लुगु’ जैसे गीत और नृत्य भी हुए। रूस के प्राकृतिक सौंदर्य को दिखाने वाले ‘या लेचू नाड रॉसियेय’ गीत और ‘नाम झित ने तुज़ित’ की प्रस्तुति को भी सराहना मिली। वहीं ‘रुस्काया उदाल’ के हास्य और जोश से भरे नृत्य ने दर्शकों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम के अंत में ‘मातुश्का रॉसिया’ (मदर रशिया) की सामूहिक प्रस्तुति हुई। सभी कलाकार एक साथ मंच पर आए तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। लोककथाओं से लेकर रूसी खानपान तक पर चर्चा महोत्सव में केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम ही नहीं हुए, बल्कि विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान और कार्यशालाएं भी रखी गईं। विशेषज्ञों ने ‘रूसी लोककथाओं में रूसी संस्कृति की अवधारणाएं’ और ‘रूसी संस्कृति को समझने की कुंजी के रूप में गैस्ट्रोनॉमिक इडियम्स’ विषय पर जानकारी दी। ‘फ्रॉस्ट एंड सन : ए वंडरफुल डे’ विषय पर कार्यशाला में रूसी भाषा की कक्षाओं में अवधारणात्मक विश्लेषण पर चर्चा हुई। छात्रों के लिए ‘रशियन फेयरी टेल मैराथन’ नाम से इमर्सिव गेम भी हुआ। इसमें छात्रों ने खेल और संवाद के जरिए रूसी लोककथाओं और भाषा को समझा। महोत्सव से छात्रों को रूसी भाषा, साहित्य, संगीत, लोकनृत्य और परंपराओं को करीब से जानने का मौका मिला। कार्यक्रम बुधवार और गुरुवार को भी जारी रहेगा।

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