महात्मा गांधी कॉलेज की जमीन पर 25 साल पुराना आदेश:इंटर कॉलेज के नाम दर्ज 2.416 हेक्टेयर जमीन, 28 को अगली सुनवाई
महराजगंज जनपद के सिसवा नगरपालिका क्षेत्र में जमीन को लेकर करीब 25 साल पुराने राजस्व आदेश पर बड़ा फैसला आया है। निचलौल के उपजिलाधिकारी अवनीश त्रिपाठी की अदालत ने ग्राम सिसवाखुर्द की 2.416 हेक्टेयर भूमि से जुड़े 29 मई 2001 के आदेश को निरस्त कर दिया है। यह जमीन पहले राजस्व अभिलेखों में बंजर श्रेणी में दर्ज थी, जिसे महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया था। अब अदालत ने नगरपालिका की कायमी प्रार्थना स्वीकार करते हुए मूल वाद को दोबारा सुनवाई के लिए खोल दिया है। मामले के अनुसार, सिसवाखुर्द के 14 गाटों की कुल 2.416 हेक्टेयर भूमि को बंजर खाते से हटाकर महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के नाम दर्ज करने का आदेश वर्ष 2001 में पारित हुआ था। नगरपालिका की ओर से 19 जून 2026 को इस आदेश के विरुद्ध कायमी प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। प्रार्थना पत्र का विरोध किया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि ग्रामसभा की सुरक्षित भूमि को गलत तरीके से विद्यालय के नाम दर्ज कराया गया। नगरपालिका का तर्क था कि वर्ष 2019 में क्षेत्र के नगरपालिका में शामिल होने के बाद इस भूमि पर उसका हित निहित है। वहीं, विद्यालय प्रबंधन की ओर से प्रार्थना पत्र का विरोध किया गया। राजस्व अधिकारियों की जांच रिपोर्ट प्रबंधक शिवेंद्र सिंह के पक्ष ने दलील दी कि भूमि वर्ष 1947 में पंजीकृत दानपत्र के जरिए विद्यालय से जुड़ी संस्था को दी गई थी और वर्ष 2001 का आदेश राजस्व अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर पारित हुआ था। प्रबंधन ने नगरपालिका की कार्रवाई को विलंबित बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद एसडीएम ने माना कि विवादित भूमि बंजर श्रेणी की रही है और इस पर ग्रामसभा व नगरपालिका का हित प्रभावित होता है। इसी आधार पर नगरपालिका की कायमी स्वीकार कर पुराना आदेश निरस्त कर दिया गया। अब मूल वाद में आपत्ति और साक्ष्य के आधार पर सुनवाई होगी। अगली तारीख 28 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। भूमि से जुड़े मामले का निस्तारण नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि गिरजेश जायसवाल ने कहा कि नगरपालिका सार्वजनिक भूमि के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। विवादित जमीन के संबंध में राजस्व अभिलेखों और कानूनी तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। नगरपालिका का प्रयास है कि भूमि से जुड़े मामले का निस्तारण नियमानुसार हो और सार्वजनिक संपत्ति के हित सुरक्षित रहें।
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