मऊ के दोहरीघाट में सरयू 70.65 मीटर पर पहुंची:खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर, मुक्तिधाम के शवदाह स्थल भी डूबे
मऊ में सरयू नदी (घाघरा) का जलस्तर लगातार खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। दोहरीघाट कस्बा स्थित गौरीशंकर घाट पर लगे मीटर गेज के अनुसार गुरुवार को नदी का जलस्तर 70.65 मीटर पहुंच गया। यह खतरे के निशान से करीब 75 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। पानी लगातार बढ़ने से दोहरीघाट क्षेत्र के निचले इलाकों और गांवों के सिवान तक पानी पहुंच गया है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से दोहरीघाट स्थित मुक्तिधाम के नीचे बने शवदाह स्थल के सभी प्लेटफार्म पानी में डूब गए हैं। हालांकि अभी टिन शेड तक पानी नहीं पहुंचा है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता प्रिंस सिंह के अनुसार पीछे से सरयू नदी का जलस्तर कम हो रहा है और फिलहाल नदी का डिस्चार्ज भी घटा है। दूसरी ओर गंगा का जलस्तर बढ़ने से सरयू में बैकफ्लो की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में धान-गन्ने की खड़ी फसल डूबी बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। चिउंटीडांड़, रामनगर, सरहरा, नईबाजार, धनौली रामपुर, गौरीडीह, उसरा, गोधनी, बीबीपुर और रोशनपुर समेत कई गांवों में बंधों के नीचे स्थित खेतों में पानी भर गया है। धान और गन्ने की खड़ी फसल पानी में डूबने लगी है। किसानों को महीनों की मेहनत और फसल में लगी लागत बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है। जहरीले जीव-जंतुओं का भी खतरा खेतों में पानी भरने के साथ पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या भी सामने आने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर और बढ़ा तो पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करना मुश्किल हो जाएगा। जलभराव वाले खेतों और इलाकों में जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं। कुछ गांवों में बिजली आपूर्ति बंद अभी तक बाढ़ का पानी गांवों की आबादी में नहीं पहुंचा है, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि दोहरीघाट कस्बे के निचले हिस्सों और कई गांवों के सिवान में पानी पहुंचने के कारण संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। दुबारी क्षेत्र में कई स्थानों पर स्कूल बंद किए गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से कुछ गांवों की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। बची जमीन को लेकर किसानों की चिंता ग्रामीणों की नजर अब लगातार सरयू के जलस्तर पर टिकी हुई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बाढ़ के साथ कटान का संकट भी पुराना है। नदी की धारा में पहले ही सैकड़ों बीघा खेत समा चुके हैं। ऐसे में जलस्तर बढ़ने के साथ बची हुई जमीन को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल आबादी सुरक्षित है, लेकिन पानी का फैलाव जारी रहने पर घरों, संपर्क मार्गों और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ने की आशंका से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
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