नगर निगम सीड बॉल से बंजर इलाकों में उगाएगा पौधे:सहारनपुर कान्हा गौशाला में गेंदे के बीज से बन रही सीड बॉल, बिना जुताई के उगेंगे पौधे
सहारनपुर शहर की ढमोला और पांवधोई नदियों के किनारों के साथ-साथ बंजर जमीनों को हरा-भरा करने के लिए नगर निगम ने नया प्रयोग शुरू किया है। बुधवार शाम पांच बजे नगर निगम की कान्हा उपवन गौशाला में गेंदे के बीजों की मदद से सीड बॉल तैयार की जा रही हैं। इन सीड बॉल्स को ऐसे स्थानों पर डाला जाएगा, जहां रोजाना पहुंचकर पौधरोपण और उनकी देखभाल करना मुश्किल होता है। नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने बताया कि नगरायुक्त शिपू गिरि के निर्देशन में बुधवार से यह नवाचार शुरू किया गया है। कान्हा गौशाला में गेंदे के बीजों को मिट्टी आदि के साथ तैयार कर सीड बॉल का रूप दिया जा रहा है। इन्हें उपयुक्त स्थानों पर पहुंचाकर जमीन पर डाला जाएगा। बारिश के बाद नमी मिलने पर इनके अंदर मौजूद बीजों के अंकुरित होने की प्रक्रिया शुरू होगी। डॉ. संदीप मिश्रा के मुताबिक सीड बॉल तकनीक की खासियत यह है कि इसके लिए जमीन की जुताई या किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। खासकर पहाड़ी, बंजर, दुर्गम और ऐसे क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जा सकता है, जहां सामान्य तरीके से पौधरोपण करना आसान नहीं है। सीड बॉल में मौजूद बीज मिट्टी की परत से सुरक्षित रहते हैं। बारिश होने पर नमी मिलने से बीजों को अंकुरण के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है। इससे पौधों को प्राकृतिक तरीके से विकसित होने का अवसर मिलता है। नगर निगम इस प्रयोग का इस्तेमाल सहारनपुर महानगर में ढमोला और पांवधोई नदी के किनारों को हरित बनाने के लिए करेगा। इसके अलावा बंजर और खाली स्थानों पर भी सीड बॉल डाली जाएंगी। इससे धीरे-धीरे इन क्षेत्रों में हरियाली विकसित करने की योजना है। अधिकारी के अनुसार हरियाली बढ़ने से मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद मिल सकती है। वहीं, पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने में भी पौधों की भूमिका रहेगी। ऐसे क्षेत्रों में जहां किसी कारण से वनस्पति नष्ट हो गई है, वहां भी सीड बॉल के जरिए दोबारा हरियाली विकसित करने का प्रयास किया जा सकता है।
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