नोएडा में यमुना सफाई का एक्शन प्लान:नालों पर लगेंगे 24 एसटीपी, 5 की डीपीआर IIT दिल्ली जांच रहा
नोएडा में यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्राधिकरण ने एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। बुधवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यमुना की सफाई के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। नोएडा में करीब 17 किलोमीटर क्षेत्र में यमुना बहती है। शहर के छोटे-बड़े नालों का पानी मुख्य कोंडली नाले के जरिए यमुना में पहुंचता है। प्राधिकरण के मुताबिक नालों में पहले से एसटीपी से ट्रीट किया हुआ पानी छोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद पानी की गुणवत्ता और बेहतर करने के लिए नालों पर अतिरिक्त ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जा रही है। 24 एसटीपी और 3 फाइको-फाइको प्लांट लगेंगे एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि योजना के तहत 24 एसटीपी लगाए जाने हैं। इनमें से 8 एसटीपी के लिए काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा 3 फाइको-फाइको ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाएंगे। प्राधिकरण का फोकस नालों से यमुना में जाने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने पर है। खासकर पानी में सीओडी और बीओडी का स्तर कम करने की योजना है। 5 एसटीपी की डीपीआर की IIT दिल्ली कर रहा जांच प्राधिकरण के मुताबिक 13 प्रस्तावित एसटीपी में से 5 की डीपीआर तैयार हो चुकी है। इनकी तकनीकी जांच IIT दिल्ली से कराई जा रही है। इन 5 एसटीपी को दिसंबर 2027 तक लगाने का लक्ष्य रखा गया है। बाकी 8 एसटीपी दिसंबर 2028 तक तैयार किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि सभी प्लांट शुरू होने के बाद नालों से यमुना में पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा और नदी पर प्रदूषण का दबाव कम होगा। केंद्र का 18,600 करोड़ से ज्यादा का नेशनल एक्शन प्लान यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने 18,600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाला नेशनल एक्शन प्लान तैयार किया है। सुप्रीम कोर्ट के 21 मई 2026 के आदेश के बाद तैयार रिपोर्ट में यमुना कैचमेंट में रोजाना 7,999.63 एमएलडी घरेलू सीवेज निकलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें से 6,243.83 एमएलडी सीवेज का ट्रीटमेंट हो रहा है, जबकि 1,755.80 एमएलडी का ट्रीटमेंट गैप अभी बना हुआ है। यूपी में सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट गैप पर्यावरणविद अभिष्ट कुसुम गुप्ता के मुताबिक गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यमुना कैचमेंट में सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट गैप उत्तर प्रदेश में बताया गया है। इसके बाद हरियाणा और दिल्ली का स्थान है। रिपोर्ट में यमुना बेसिन में 520 बड़े नालों की पहचान की गई है। प्रमुख नालों के जरिए दिल्ली से करीब 5,188 एमएलडी, यूपी से 2,972.66 एमएलडी और हरियाणा से करीब 1,493 एमएलडी पानी निकल रहा है। रिपोर्ट में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा, गुरुग्राम और फरीदाबाद को प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है।
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