प्रयागराज की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में LLM कोर्स पर सवाल:UGC गाइडलाइन दरकिनार कर दिए प्रवेश, 20 विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट

Sep 26, 2026 - 21:12
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प्रयागराज की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में LLM कोर्स पर सवाल:UGC गाइडलाइन दरकिनार कर दिए प्रवेश, 20 विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट
प्रयागराज की डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (आरपीएनएलयू) में संचालित एक वर्षीय एलएलएम (लोक विधि) पाठ्यक्रम को लेकर अनियमितता सामने आई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक वर्षीय एलएलएम उपाधि कार्यक्रम दिशानिर्देश 2012 की अनिवार्य शर्तों को नजरअंदाज कर कोर्स में प्रवेश देना शुरू कर दिया है। हालात यह हैं कि बिना जरूरी आधारभूत ढांचे और संकाय के पिछले सत्र में 10 और इस सत्र में भी 10 यानी 20 विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया गया है, जिससे इन छात्रों के भविष्य और डिग्री की वैधता पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। यूजीसी के नियमों की अनदेखी यूजीसी के निर्देशों के अनुसार एक वर्षीय एलएलएम पाठ्यक्रम के लिए सीपीजीएलएस की अनिवार्यता है। इस पाठ्यक्रम का संचालन उन्हीं संस्थानों में हो सकता है जहां सेंटर फॉर पोस्ट-ग्रेजुएट लीगल स्टडीज (सीपीजीएलएस) स्थापित हो। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में कम से कम 10 पूर्णकालिक शिक्षक होने चाहिए, जिनमें न्यूनतम 4 प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर शामिल हों। विद्यार्थियों और प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर का अनुपात 5:1 से अधिक नहीं होना चाहिए। आरपीएनएलयू में मानकों को किया दरकिनार प्रयागराज के एक अधिवक्ता ने इसकी शिकायत शासन में की है। आरोप है कि आरपीएनएलयू में यूजीसी की गाइडलाइन को दरकिनार किया गया। विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर पोस्ट-ग्रेजुएट लीगल स्टडीज की स्थापना नहीं की गई है और न ही एक भी नियमित प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर हैं। यूजीसी के 5:1 के अनुपात के नियम के तहत 10 विद्यार्थियों के लिए भी कम से कम दो प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर होना अनिवार्य है, जबकि यहाँ एक भी वरिष्ठ संकाय सदस्य उपलब्ध नहीं है। फिर भी दो सत्रों में 20 छात्रों को प्रवेश दिया गया। यूनिवर्सिटी की इस लापरवाही का खामियाजा उन 20 विद्यार्थियों को भुगतना पड़ सकता है जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई और एक साल का बहुमूल्य समय इस पाठ्यक्रम में लगाया है। यदि भविष्य में इन डिग्रियों की मान्यता या समकक्षता पर सवाल उठता है तो छात्रों को नेट (NET), पीएचडी प्रवेश, उच्च शिक्षण संस्थानों और न्यायिक सेवाओं में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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