प्रयागराज में एकादशी पर राम-हनुमान का अनूठा मिलन:रामलीला के बाद बड़े हनुमान जी के दरबार पहुंचते हैं प्रभु श्रीराम के स्वरूप
प्रयागराज में रामलीला के समापन के बाद एकादशी पर निभाई जाने वाली परंपरा श्रद्धा और भक्ति का अनूठा दृश्य प्रस्तुत करती है। संगम तट स्थित प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का स्वरूप धारण करने वाले कलाकार पहुंचते हैं और बजरंग बली के दर्शन-पूजन करते हैं। दशकों से चली आ रही इस परंपरा में रामलीला के कलाकार और कमेटी के पदाधिकारी शामिल होते हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद यह टोली मां अलोपशंकरी के दरबार में भी शीश नवाती है और रामलीला के सकुशल संपन्न होने पर कृतज्ञता व्यक्त करती है। एकादशी पर निभाई जाती है परंपरा शारदीय नवरात्र के पहले दिन से विजयादशमी तक चलने वाली ऐतिहासिक रामलीला के समापन के बाद एकादशी पर यह आयोजन होता है। पारंपरिक वेशभूषा और शृंगार में सजे राम, सीता और लक्ष्मण के स्वरूप बंधवा स्थित लेटे हनुमान जी के मंदिर पहुंचते हैं। उनके मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही जय श्रीराम और जय बजरंग बली के जयकारे गूंजने लगते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम अपने अनन्य भक्त हनुमान जी को दर्शन देने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने आते हैं। हनुमान जी की पूजा कर मांगते हैं नगर के कल्याण का आशीर्वाद मंदिर में रामलीला के प्रमुख पात्रों और कमेटी के पदाधिकारियों की मौजूदगी में बजरंग बली की विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाती है। इस दौरान रामलीला के निर्विघ्न आयोजन के लिए हनुमान जी के प्रति आभार जताया जाता है और नगर के कल्याण की कामना की जाती है। मां अलोपशंकरी के दरबार में भी लगाते हैं हाजिरी बड़े हनुमान जी के दर्शन के बाद रामलीला के कलाकारों और आयोजकों का दल प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां अलोपशंकरी मंदिर पहुंचता है। वहां माता के चरणों में शीश नवाकर आयोजन की पूर्णता के लिए कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। साथ ही प्रार्थना की जाती है कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा आने वाले वर्षों में भी निरंतर जारी रहे।
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