फॉर्म-6 पर राहुल गांधी का चुनाव आयोग से बड़ा सवाल, पूछा- आदेश किसने दिया

राहुल गांधी ने मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा कि यह बदलाव कराने का आदेश किस अधिकारी ने दिया और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में इसे किसने मंजूरी दी। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि उसके साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।

Oct 01, 2026 - 11:13
Updated: 15 days ago
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फॉर्म-6 पर राहुल गांधी का चुनाव आयोग से बड़ा सवाल, पूछा- आदेश किसने दिया

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 1 अक्टूबर 2026

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव करने का आदेश आयोग में किस अधिकारी ने दिया था। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि इस बदलाव को लागू करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में किस अधिकारी ने मंजूरी दी थी और क्या इसके लिए किसी तरह का दबाव बनाया गया था।

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से क्या पूछा

राहुल गांधी ने एक अक्टूबर को चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में कथित रूप से बदलाव किया गया था। उन्होंने आयोग से यह स्पष्ट करने की मांग की कि इस बदलाव का आदेश किस अधिकारी ने दिया था। उन्होंने यह भी पूछा कि संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में किस अधिकारी ने बदलाव को मंजूरी दी और उसके लिए हस्ताक्षर किए।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की भूमिका पर भी सवाल

राहुल गांधी ने अपने बयान में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग की ओर से कंपनी को फॉर्म-6 में बदलाव करने का निर्देश किसने दिया था। साथ ही उन्होंने पूछा कि कंपनी के भीतर इस बदलाव को मंजूरी देने वाला अधिकारी कौन था और क्या किसी अधिकारी पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाया गया था।

क्या है फॉर्म-6 का मामला

फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। इसी ऑनलाइन फॉर्म में विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर विवाद सामने आया है। इस अतिरिक्त घोषणा को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्ति दर्ज किए जाने की खबर सामने आई थी।

आयोग और राहुल गांधी के दावों में अंतर

द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव को लेकर आयोग के भीतर आपत्ति दर्ज की थी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मूल वैधानिक फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।

चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी

चुनाव आयोग के अनुसार, अतिरिक्त घोषणा-पत्र विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े आदेशों के तहत मांगी गई एक अतिरिक्त आवश्यकता थी। आयोग का कहना है कि इसे मूल फॉर्म-6 में संशोधन नहीं माना जाना चाहिए। इस तरह मामले में एक तरफ फॉर्म में बदलाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि आयोग इसे अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ने की प्रक्रिया बता रहा है।

मामला क्यों महत्वपूर्ण है

मतदाता सूची में नए मतदाताओं का नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में इसके प्रारूप या प्रक्रिया में किसी भी बदलाव को लेकर पारदर्शिता और जिम्मेदारी से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। राहुल गांधी के सवालों के बाद अब इस मामले में यह चर्चा तेज हो गई है कि अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ने की प्रक्रिया किस स्तर पर तय की गई थी।

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