रेलवे ने सुरक्षा जांचने के लिए की गोपनीय मॉक ड्रिल:ट्रेन की दो बोगियां पटरी से उतरीं, यात्री घायल होने पर पहुंची रेस्क्यू टीम
प्रतापगढ़ में रेलवे की सुरक्षा और संरक्षा व्यवस्था की हकीकत परखने के लिए मंगलवार शाम करीब 6 बजे गौरा रेलवे स्टेशन के पास गोपनीय मॉक ड्रिल कराई गई। ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने, दो बोगियों के पटरी से उतरने और यात्रियों के घायल होने की सूचना मिलते ही रेलवे और पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। करीब एक घंटे तक चली ड्रिल में पुलिस, रेलवे और आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया और मौके पर पहुंचने का समय परखा गया। ट्रेन रुकवाकर प्रसारित कराई हादसे की सूचना मॉक ड्रिल की योजना सीनियर डीएसओ लखनऊ अरुण कुमार, टी सेफ्टी लखनऊ एनएल पांडेय, पीडब्ल्यूआई सेफ्टी सुनील कुमार और ट्रैफिक सेफ्टी एसपी गौतम ने तैयार की थी। ड्रिल को गोपनीय रखा गया था, ताकि संबंधित विभागों की वास्तविक आपातकालीन प्रतिक्रिया का आकलन किया जा सके। मंगलवार शाम सीनियर डीएसओ अरुण कुमार और टी सेफ्टी लखनऊ एनएल पांडेय प्रतापगढ़ से वाराणसी जा रही पैसेंजर ट्रेन संख्या 55142 में सवार हुए। गौरा स्टेशन पहुंचने से पहले गौरा माइनर के पास ट्रेन रुकवाई गई। इसके बाद गार्ड और ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर रवि प्रकाश मिश्र के माध्यम से सूचना प्रसारित कराई गई कि ट्रेन की दो बोगियां पटरी से उतर गई हैं और कुछ यात्री घायल हैं। सूचना मिलते ही रेलवे-पुलिस की टीमें दौड़ीं हादसे की सूचना मिलते ही आरपीएफ, स्थानीय पुलिस, रेलवे सुरक्षा और संरक्षा अधिकारी-कर्मचारी, स्टेशन मास्टर, स्टेशन अधीक्षक और एंबुलेंस मौके के लिए रवाना हो गए। मॉक ड्रिल की गोपनीयता बनाए रखने के लिए दोनों अधिकारियों ने गार्ड और स्टेशन मास्टर के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए थे। इससे सूचना के पहले से बाहर जाने की संभावना नहीं रही और आपात स्थिति में विभागों की वास्तविक प्रतिक्रिया को परखा जा सका। 10 मिनट में फतनपुर पुलिस पहुंची सीओ रानीगंज प्रशांत राज हुड्डा ने बताया कि फतनपुर थाने को शाम करीब 6 बजे ट्रेन के पटरी से उतरने की सूचना मिली। पुलिस टीम करीब 10 मिनट में रेलवे स्टेशन पहुंच गई। इसके बाद शाम 6:35 बजे रानीगंज थाने की फोर्स भी मौके पर पहुंच गई। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने रेलवे अधिकारियों और स्टेशन मास्टर से घटना की जानकारी ली। बातचीत के बाद पता चला कि ट्रेन संख्या 55141/55142 के संबंध में शाम करीब 5:40 बजे से 6:40 बजे तक मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। रिस्पांस टाइम और विभागों के बीच समन्वय परखा सीओ के मुताबिक, मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन सेवाओं की तत्परता, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और पुलिस बल के मौके पर पहुंचने के समय का आकलन करना था। करीब 15 से 20 मिनट के भीतर दोनों थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। मॉक ड्रिल पूरी होने के बाद रेलवे अधिकारियों ने पुलिस और अन्य टीमों की समय पर प्रतिक्रिया पर संतोष जताया। इसके बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया गया।
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