शेयर बाजार में मची भारी तबाही

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई और निफ्टी दो साल पहले के स्तर के आसपास पहुंच गया। अमेरिका ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाएं और वैश्विक बाजारों में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी 23000 के स्तर से नीचे फिसलता है तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है।

शेयर बाजार में मची भारी तबाही

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 9 जून 2026

दो साल बाद फिर उसी स्तर पर पहुंचा बाजार

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। करीब दो वर्षों के दौरान बाजार में अपेक्षित बढ़त नहीं देखने को मिली और निफ्टी फिर से लगभग उसी स्तर पर पहुंच गया जहां वह 8 जून 2024 को था। ताजा बिकवाली के बाद निवेशकों में चिंता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निफ्टी पचास में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक तेईस हजार के आसपास पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे एक नहीं बल्कि कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं।

अमेरिका और ईरान के तनाव ने बढ़ाई चिंता

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले और उसके जवाब में इजरायली कार्रवाई के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। युद्ध जैसी स्थिति बनने से निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ा है।

कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल

युद्ध की आशंका के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर छियानवे डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है।

महंगाई बढ़ने का खतरा

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ घरेलू रसोई गैस के दामों में भी वृद्धि देखने को मिली है। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। यदि ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने बढ़ाई परेशानी

हाल ही में जारी अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने बाजार को चौंका दिया है। उम्मीद से अधिक रोजगार सृजन ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है। हालांकि शेयर बाजार के लिए यह अच्छी खबर नहीं मानी जा रही क्योंकि मजबूत अर्थव्यवस्था का मतलब यह भी है कि महंगाई का दबाव बना रह सकता है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद यह संभावना काफी कम हो गई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती करेगा। कुछ विशेषज्ञ तो यह भी मान रहे हैं कि वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार से दूर हो रहा है।

अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट

वैश्विक आर्थिक चिंताओं के बीच अमेरिकी शेयर बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र आधारित सूचकांक में चार प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। इसका असर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर भी पड़ा और संबंधित शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

एशियाई बाजारों में भी मचा हड़कंप

दक्षिण कोरिया, जापान और अन्य प्रमुख एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। कई प्रमुख सूचकांक चार से छह प्रतिशत तक टूट गए। इस वैश्विक कमजोरी ने भारतीय निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित किया और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और चिप कंपनियों में बिकवाली

पिछले कुछ वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेज तेजी देखने को मिली थी। अब निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से इन क्षेत्रों में गिरावट शुरू हो गई है। दुनिया की कई बड़ी चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है जिसका असर भारतीय तकनीकी कंपनियों पर भी पड़ा है।

कमजोर मानसून की आशंका से बढ़ी चिंता

घरेलू स्तर पर मौसम को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। कमजोर मानसून या कम बारिश के शुरुआती अनुमानों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और ग्रामीण मांग में गिरावट देखने को मिल सकती है।

सोना और चांदी में भी कमजोरी

वैश्विक अस्थिरता के बावजूद सोमवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। चांदी में प्रति किलोग्राम बड़ी गिरावट देखने को मिली जबकि सोना भी सस्ता हुआ। कीमती धातुओं में आई कमजोरी ने निवेशकों को अतिरिक्त झटका दिया है।

रुपये पर भी बढ़ा दबाव

भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर नए निचले स्तरों के करीब पहुंच गई। कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है और महंगाई बढ़ाने का काम करता है। यदि रुपये पर दबाव बना रहता है तो भारतीय रिजर्व बैंक को सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख

 तेईस हजार का स्तर निफ्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यह स्तर टूटता है तो बिकवाली और तेज हो सकती है। विश्लेषकों के अनुसार ऐसी स्थिति में सूचकांक बाईस हजार सात सौ के स्तर तक भी फिसल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी हुई है।