सारा अली खान के बाद अब उमर अब्दुल्ला पर फतवा:शादी को बताया 'नाजायज', मौलाना शहाबुद्दीन बोले- पहले निधि राजदान को कलमा पढ़वाकर धर्म परिवर्तन करवाए

Nov 01, 2026 - 13:44
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सारा अली खान के बाद अब उमर अब्दुल्ला पर फतवा:शादी को बताया 'नाजायज', मौलाना शहाबुद्दीन बोले- पहले निधि राजदान को कलमा पढ़वाकर धर्म परिवर्तन करवाए
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने लगातार दो बड़े फतवे जारी कर मजहबी और सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पहले बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ जाने और पूजा-पाठ करने पर फतवा जारी किया गया, और अब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला व पत्रकार निधि राजदान के रिश्ते को लेकर फतवा दिया गया है। उमर अब्दुल्ला की शादी को बताया शरीयत के खिलाफ अभिनेत्री पर दिए गए फतवे के तुरंत बाद मौलाना ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की शादी पर भी सवाल उठा दिए। मौलाना ने उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान के विवाह को इस्लामी कायदे-कानून के तहत पूरी तरह नाजायज करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में शादी-ब्याह को लेकर कुछ तयशुदा उसूल और जाब्ते मुकर्रर हैं, जिनका पालन करना हर मुसलमान के लिए जरूरी है। इस्लाम में निकाह की बुनियादी शर्तें और जाब्ते मौलाना ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि निकाह का पहला और बुनियादी उसूल यह है कि लड़का और लड़की दोनों का कलमा पढ़कर इस्लाम का अनुयायी होना अनिवार्य है। अगर दोनों में से कोई एक भी गैर-मुस्लिम रहता है, तो उस निकाह को किसी भी सूरत में शरीयत के मुताबिक जायज नहीं माना जा सकता। उमर अब्दुल्ला मुसलमान हैं जबकि निधि राजदान गैर-मुस्लिम हैं, लिहाजा यह रिश्ता शादी नहीं बल्कि नाजायज है। धर्म परिवर्तन के बिना रिश्ते को बताया अमान्य मौलाना ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उमर अब्दुल्ला को चाहिए था कि वह पहले निधि राजदान को कलमा पढ़वाकर विधिवत इस्लाम कबूल करवाते और उसके बाद शादी करते, तो इस रिश्ते को इस्लामी नजरिए से जायज ठहराया जा सकता था। चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए यह विवाह इस्लाम की नजर में बिल्कुल भी मान्य नहीं है। सारा अली खान के केदारनाथ दर्शन पर मौलाना का रुख मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सारा अली खान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी मुसलमान मर्द या औरत अगर मंदिर में पूजा-पाठ या दर्शन करने जाता है, तो यह शरीयत की रोशनी में पूरी तरह नाजायज और हराम है। मौलाना के अनुसार, सारा अली खान केदारनाथ मंदिर गईं और वहां पूजा-पाठ की, जो शरीयत के मुताबिक सख्त मना है। उन्होंने कहा कि सारा अली खान शरीयत की नजर में मुजरिम और गुनेहगार हैं, इसलिए उन्हें अपने इस काम पर तौबा करनी चाहिए। सियासी और सामाजिक हलकों में छिड़ी तीखी बहस एक तरफ जहां बरेलवी मरकज से जुड़े उलेमा इन दोनों फैसलों को शरीयत और इस्लामी उसूलों की पाबंदी बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग इसे निजी आजादी, धार्मिक सद्भाव और व्यक्तिगत फैसलों में दखलअंदाजी मान रहे हैं। एक मशहूर अदाकारा और एक सूबे के वजीर-ए-आला के खिलाफ लगातार आए इन फतवों ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के राजनीतिक मंचों तक बहस छेड़ दी है।

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