सिद्धार्थनगर में लंबित मुकदमों के चलते पासपोर्ट रोका:हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में फैसला करने को कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ किया है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ सिर्फ मुकदमा चलने की वजह से उसका पासपोर्ट नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट जारी होना और विदेश जाना दो अलग-अलग बातें हैं। यह मामला सिद्धार्थनगर के एक व्यक्ति से जुड़ा है। उसके खिलाफ 2013 में सिद्धार्थनगर थाने में धारा 294 के तहत दो मुकदमे दर्ज हुए थे, जो अभी अदालत में चल रहे हैं। इन्हीं मुकदमों के कारण उसका पासपोर्ट दोबारा जारी करने से रोक दिया गया था। व्यक्ति ने 9 मार्च 2026 को लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के पास आवेदन किया था। विदेश जाने से मुकदमे पर असर मुकदमों के लंबित होने की बात सामने आने पर आवेदन पर कार्रवाई रोक दी गई। अधिवक्ता गणेश शंकर श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में व्यक्ति का पक्ष रखा। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि अगर अदालत को लगता है कि विदेश जाने से मुकदमे पर असर पड़ेगा, तो वह विदेश जाने पर रोक लगा सकती है। पुराने हाईकोर्ट के कुछ फैसलों की भी चर्चा पासपोर्ट अधिकारी सिर्फ मुकदमा लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट जारी करने से मना नहीं कर सकता। सुनवाई के दौरान पुराने हाईकोर्ट के कुछ फैसलों की भी चर्चा हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर बाद में स्थिति साफ कर चुका है। इसलिए पासपोर्ट अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार आवेदन पर कार्रवाई करनी होगी। दो सप्ताह के भीतर फैसला किया 30 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया। कोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ को निर्देश दिया कि पासपोर्ट दोबारा जारी करने के लिए दिए गए आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार दो सप्ताह के भीतर फैसला किया जाए। मामले में संबंधित पक्षों को भी दो सप्ताह में अपना जवाब देने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को होगी। कोर्ट ने अपने आदेश की जानकारी क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी तक 24 घंटे के भीतर पहुंचाने का भी निर्देश दिया है।
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