समाज चाहता है बहनजी और हम साथ आएं:संभल में चंद्रशेखर बोले- बहुत प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हुए; एक हाथ से ताली नहीं बजती

Sep 29, 2026 - 17:42
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समाज चाहता है बहनजी और हम साथ आएं:संभल में चंद्रशेखर बोले- बहुत प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हुए; एक हाथ से ताली नहीं बजती
संभल में चंद्रशेखर आजाद ने गठबंधन से लेकर 2027 की सियासत तक अपनी रणनीति साफ कर दी। मंगलवार को प्रेसवार्ता में उन्होंने मायावती के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताते हुए कहा कि समाज चाहता है कि बहनजी और हम साथ आएं, लेकिन एक हाथ से ताली नहीं बजती। वहीं ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव में धांधली के आरोपों के बीच पूरा चुनाव निरस्त कराया जाए और फिर कार्यकर्ताओं के बूते चुनाव लड़ा जाए। एमएलसी चुनाव को विपक्ष की ताकत की परीक्षा बताते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि इसी से 2027 से पहले विपक्ष की तैयारी का पता चल जाएगा। एमएलसी चुनाव में विपक्ष की ताकत का पता चलेगा चंद्रशेखर आजाद ने कहा- एमएलसी का चुनाव एक सीट को छोड़कर हमारी पार्टी नहीं लड़ रही है। विपक्ष लड़ रहा है। अब उनमें कितना दम है, यह इस बार के एमएलसी चुनाव में दिख जाएगा। अगर उनकी तैयारी मजबूत है और वे भाजपा को हराने की स्थिति में हैं तो एमएलसी चुनाव में ही 2027 से पहले स्पष्ट हो जाएगा कि वे कितने पानी में हैं। बेरोजगारी, पेपर लीक और कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा उन्होंने कहा- यूपी में आज पढ़ा-लिखा नौजवान बेरोजगार घूम रहा है। स्कूल बंद हो रहे हैं, शराब की दुकानें खुल रही हैं, कॉलेजों में हिंसा हो रही है। छात्रसंघ चुनाव बंद हैं। किसान की फसलों का नाश हो गया है। अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं। चारों तरफ हाहाकार मचा है। कोई भर्ती ऐसी नहीं है, जिसका पेपर लीक न होता हो या घोटाला न होता हो। चंद्रशेखर ने कहा- यूपी की सरकार में क्राइम के क्या हाल हैं, चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। रोज हत्याएं हो रही हैं। अगर कानून-व्यवस्था अच्छी है तो लोगों की जान क्यों जा रही है। बहुत बुरे हालात में लोग सर्वाइव कर रहे हैं और लोगों के मन में इच्छा है कि 2027 में भाजपा की इस सरकार का अंत करें। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बातें कहने के बाद चंद्रशेखर ने मीडिया के सवालों का भी जवाब दिया। विस्तार से पढ़िए सवाल-जवाबः- सवाल: मायावती ने आप पर भाजपा की बी-टीम के रूप में काम करने का आरोप लगाया है? जवाब: राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तो लगते रहते हैं। अब विपक्ष के लोग उनके ऊपर आरोप लगाते हैं। मैं तो इन सब चीजों को सुन रहा हूं। मैं आपको अपना पक्ष बता देता हूं। मेरी नहीं, बहनजी की नहीं, समाज की इच्छा है कि हम लोग मिलकर काम करें। आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के मेहनती कार्यकर्ताओं के भरोसे और नगीना-बिजनौर की महान स्वाभिमानी जनता के भरोसे दोबारा चुनाव में जाने को तैयार हूं। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि जनता किसके साथ खड़ी है। सवाल: सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि भाजपा-आरएसएस मानवतावादी नहीं है और मनुस्मृति लागू करना चाहते हैं। आरक्षण खत्म करना चाहते हैं...? जवाब: उनकी पार्टी कौन-सी मानवतावादी है? उन्होंने भी तो बाबा साहेब और कांशीराम साहब के नाम पर जो भी था सब बदल दिए। वह कौन-सी मानवतावादी पार्टी है। रामजी लाल अच्छे आदमी हैं। उस पार्टी में बेचारे अब उनके घर-वगैरह तोड़ दिए गए, बेचारे परेशान हैं। क्या कर सकते हैं। सब घूम रहे हैं, उन्हें नहीं घूमने दिया जा रहा है। सवाल: असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद को कई बार साथ देखा गया है। क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन होगा? जवाब: नगर पंचायत और नगर निगम के चेयरमैन का चुनाव था तो हमने सहारनपुर से लेकर पूरे यूपी में जयंत चौधरी के साथ चुनाव लड़ा। वह भाजपा में चले गए, अखिलेश जी इंडिया अलायंस में चले गए और हम जनता के बीच में रह गए। यह चुनावी अलायंस है। कल क्या होगा, इसके बारे में मैं आज घोषणा नहीं कर सकता। मैं भविष्यवाणी नहीं करता हूं। सवाल: आपको और असदुद्दीन ओवैसी को कोई दल साथ लेने को तैयार नहीं है? क्या वोट खिसकने या पार्टी के वजूद में आने का डर है? जवाब: यह तो आप कह रहे हैं। आपको अंदर की बात कहां पता है कि कोई लेना चाह रहा है या नहीं लेना चाह रहा। दूसरे लोग लेने के नाम पर सिर्फ हमारे लोगों का वोट चाहते हैं। यह राजनीतिक बात है। आपके पास सोर्स होते हैं, पता करो कि 2017 और 2022 में भाजपा को क्यों नहीं हरा पाए। इन्होंने पहले भी 250-300 सीटें हारी हैं। ये किसी को साथ लेकर भाजपा को हराना नहीं चाहते, बल्कि भाजपा का रास्ता आसान करना चाहते हैं। अगर इनको चिंता होती तो ये सबको साथ लेकर चलते। भाजपा 44 पार्टियों को साथ लेकर लोकसभा चुनाव लड़ी। विपक्ष, जो मजबूत लोग हैं, जिनके पास वोट हैं, उनको साथ लेकर नहीं लड़ना चाहते। ये रास्ते ढूंढ रहे हैं कि भाजपा को कैसे जिताया जाए। सवाल: 2027 के विधानसभा चुनाव में यूपी में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है? जवाब: हमने 87 प्रभारी घोषित किए हैं और अभी अगले एक सप्ताह बाद दोबारा लिस्ट जारी करेंगे। 2022 से हम मेहनत कर रहे हैं। 2024 में सिर्फ दो सीटों पर लड़े। इस बार हमारे कार्यकर्ता पूरे रंग में हैं। कार्यकर्ताओं को लगता है कि आजाद समाज पार्टी के जरिए भाजपा को चुनाव में हराकर जनता की सरकार बनाएंगे। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ेंः- पूर्व IAS दिव्या मित्तल की यूपी की राजनीति में एंट्री:बोलीं- डरूंगी नहीं, हिसाब मांगूंगी, किसी पार्टी का नहीं, आपका साथ चाहिए यूपी की पूर्व IAS दिव्या मित्तल राजनीति में उतरेंगी। उन्होंने मंगलवार सुबह 8.30 बजे फेसबुक पर वीडियो जारी करके इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा- यूपी में ही रहूंगी। डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी। मुझे पैसा और बाहुबल नहीं चाहिए। सिर्फ आप लोगों का साथ चाहिए। उन्होंने कहा- मैं किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ूंगी। अकेले चलूंगी। मेरा मकसद राजनेता बदलना नहीं, बल्कि पूरी राजनीति को बदलना है। हमारी राजनीति में सत्ता है, शिलान्यास है, शोर है, लेकिन सोच नहीं है। मुझे अपने देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए। दिव्या मित्तल के ऐलान के बाद दैनिक भास्कर ने उनसे बात की। उन्होंने कहा- मिर्जापुर से राजनीति करूंगी या नहीं, इस पर अभी निर्णय लेना है। राजनीतिक कार्यक्रमों की शुरुआत को लेकर जानकारी जल्द दूंगी। अभी आगे की योजना बना रही हूं। पढ़ें पूरी खबर…

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