संभल हिंसा आरोपी मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द:SC ने महीनेभर में सरकार को 10 लाख देने का दिया आदेश

Sep 30, 2026 - 18:03
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संभल हिंसा आरोपी मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द:SC ने महीनेभर में सरकार को 10 लाख देने का दिया आदेश
संभल में 24 नवंबर 2024 की संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी निवारक हिरासत आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को अफरोज को एक महीने के भीतर 10 लाख रुपए देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि लागत (कॉस्ट) के रूप में अफरोज को दी जाएगी। साथ ही आदेश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उसकी हिरासत जरूरी नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। 41 पेज के फैसले में NSA कार्रवाई रद्द सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 41 पेज का है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 8 जून 2026 के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें अफरोज की NSA के तहत हिरासत को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निवारक हिरासत के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री से भविष्य में किसी ऐसी गतिविधि को रोकने की वास्तविक जरूरत स्पष्ट होनी चाहिए, जो सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हो। केवल पहले से चल रहे आपराधिक मुकदमे के आरोपों को दोहराना निवारक हिरासत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अफरोज के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों के गुण-दोष पर वह कोई राय नहीं दे रहा है। वे मामले कानून के अनुसार चलते रहेंगे और सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का उन मुकदमों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पुलिस हिरासत के कथित कबूलनामे पर उठाया सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को NSA के तहत निवारक हिरासत का आधार बनाया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने माना कि इस तरह के कथित कबूलनामे को अकेले हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता और संबंधित परिस्थितियों व अन्य सामग्री पर भी विचार किया जाना जरूरी है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि अफरोज की रिहाई से क्षेत्र में दोबारा हिंसा भड़कने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। सरकार ने इसी आधार पर निवारक हिरासत को जरूरी बताया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत आदेश को कानून के मुताबिक टिकाऊ नहीं माना और उसे रद्द कर दिया। हिंसा के करीब 54 दिन बाद हुई थी अफरोज की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक 24 नवंबर 2024 को संभल में मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई। मुल्ला अफरोज का नाम उस मुख्य एफआईआर में नहीं था। उसे करीब 54 दिन बाद 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह इस घटना से जुड़े अन्य मामलों में भी न्यायिक हिरासत में रहा। 13 अक्टूबर 2025 को संभल के जिलाधिकारी ने अफरोज के खिलाफ NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया था। 28 नवंबर 2025 को इस हिरासत की पुष्टि की गई और अवधि एक साल तय की गई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में हिरासत आदेश को बरकरार रखा, जिसके खिलाफ अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने कहा- हिरासत को सजा का विकल्प नहीं बनाया जा सकता फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब सामान्य आपराधिक प्रक्रिया पहले से चल रही हो और उसी घटना को लेकर मुकदमे लंबित हों, तब असाधारण निवारक हिरासत की शक्ति इस्तेमाल करने के लिए अधिक कड़ी कानूनी जांच जरूरी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस मामले में प्रक्रिया ही सजा में बदल गई। सुप्रीम कोर्ट ने अंत में हाईकोर्ट के फैसले, हिरासत आदेश और उसकी पुष्टि के आदेश को रद्द कर दिया। अफरोज को किसी अन्य मामले में हिरासत की जरूरत नहीं होने पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया। साथ ही राज्य सरकार को एक महीने के भीतर 10 लाख रुपए की लागत अफरोज को देने का निर्देश दिया गया। 24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए चंदौसी की सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन मस्जिद का पहला सर्वे हुआ था। 24 नवंबर को दूसरे चरण के सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और इसके बाद हिंसा भड़क गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद संभल कोतवाली और नखासा थाने में कई मुकदमे दर्ज किए गए थे। हिंसा से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। मुल्ला अफरोज के खिलाफ भी इन्हीं मामलों में कार्रवाई हुई थी। उसके खिलाफ NSA की कार्रवाई अक्टूबर 2025 में की गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। आपराधिक मामलों पर फैसले का असर नहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि उसका फैसला केवल NSA के तहत निवारक हिरासत से संबंधित है। अफरोज के खिलाफ हिंसा से जुड़े जो आपराधिक मामले चल रहे हैं, उनके गुण-दोष पर अदालत ने कोई फैसला नहीं दिया है। इसलिए अन्य मामलों में उसकी हिरासत आवश्यक होने पर वह रिहा नहीं होगा। --------------------------- यह इंटरव्यू भी पढ़िए- रोहिणी बोलीं- चुनाव लड़ने नहीं, लड़वाने आई हूं, अखिलेश या कांग्रेस नहीं, वाल्मीकियों को हिस्सेदारी देने वाले को समर्थन देंगे स्विट्जरलैंड में 6 साल बिताने के बाद भारत लौटीं रोहिणी घावरी अब अपने वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने और स्विट्जरलैंड में 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। दिल्ली, हरियाणा और मेरठ के बाद वे लखनऊ पहुंचीं। पढ़िए पूरी खबर…

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