स्पिरिट ले जाने भर से टैंकर खतरनाक वाहन नहीं:हाईकोर्ट ने कहा- बीमा कंपनी को साबित करना होगा कि उसमें प्रतिबंधित श्रेणी का पदार्थ था
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने साफ किया है कि सिर्फ स्पिरिट या इथेनॉल ले जाने से टैंकर को खतरनाक वाहन नहीं मान सकते। बीमा कंपनी को साबित करना होगा कि टैंकर में प्रतिबंधित श्रेणी का पदार्थ था। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की बेंच ने बीमा कंपनी की अपील पर यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना के समय टैंकर में स्पिरिट होना ही चालक के लाइसेंस में विशेष अनुमति की जरूरत साबित नहीं करता। यह मामला मार्च 2015 की सड़क दुर्घटना का है, जिसमें महेंद्र कुमार की मौत हुई थी। सुल्तानपुर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मृतक के वारिसों को 19.04 लाख रुपये और सात प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि चालक के पास खतरनाक पदार्थों के परिवहन की अतिरिक्त अनुमति नहीं थी और स्पिरिट एक खतरनाक पदार्थ है। कोर्ट ने नियमों की जांच की और पाया कि स्पिरिट या इथेनॉल की हर किस्म खतरनाक नहीं है। टैंकर के पदार्थ को खतरनाक श्रेणी में साबित करने वाला कोई सबूत रिकॉर्ड में नहीं था। इसलिए बीमा कंपनी का तर्क खारिज हुआ।
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