धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जश्न, सोनम वांगचुक की नसीहत!
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के जश्न वाले वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बीच सोनम वांगचुक ने जीत के बाद विनम्रता, संयम और जिम्मेदारी बनाए रखने की सलाह दी है। सामाजिक माध्यमों पर इस मुद्दे को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के जश्न मनाने वाले वीडियो सामाजिक माध्यमों पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इन वीडियो को लेकर जहां समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छिड़ी हुई है, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए जीत के बाद विनम्रता और जिम्मेदारी बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी जनआंदोलन की सफलता केवल लक्ष्य प्राप्त करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके बाद का आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जश्न पर उठे सवाल
धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के कुछ सदस्यों द्वारा उत्सव मनाए जाने के वीडियो सामने आए। इन वीडियो में कई युवा नाचते, गाते और खुशी जाहिर करते दिखाई दिए। इसके बाद सामाजिक माध्यमों पर इस प्रकार के उत्सव को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जिस आंदोलन की पृष्ठभूमि में विद्यार्थियों की परेशानियां और कथित परीक्षा अनियमितताएं रही हों, वहां अत्यधिक उत्सव उचित है या नहीं।कुछ लोगों ने इसे आंदोलन की उपलब्धि बताया, जबकि अन्य लोगों का कहना है कि इस प्रकार का प्रदर्शन आंदोलन के मूल उद्देश्य से ध्यान भटका सकता है। इसी बहस के बीच यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न मंचों पर लोग आंदोलन की दिशा और उसके संदेश पर अपनी राय रख रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने क्या कहा
सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी संघर्ष के बाद सफलता मिलना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन सफलता के साथ विनम्रता बनाए रखना उससे भी अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनआंदोलन केवल विरोध का माध्यम नहीं होते, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का भी कार्य करते हैं। ऐसे में आंदोलन से जुड़े लोगों को अपने व्यवहार और संदेश दोनों पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे अपनी उपलब्धियों का उत्सव गरिमा, संयम और जिम्मेदारी के साथ मनाएं। वांगचुक का मानना है कि किसी भी बड़े सामाजिक अभियान की विश्वसनीयता उसके नेतृत्व और समर्थकों के आचरण से भी तय होती है। इसलिए सार्वजनिक जीवन में संतुलन और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
छात्र आंदोलन में रही सोनम वांगचुक की सक्रिय भूमिका
हाल के दिनों में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक एक प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आए। उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों के समर्थन में लंबी भूख हड़ताल भी की थी। आंदोलन के दौरान उनकी सक्रिय भागीदारी ने देशभर का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया था।बाद में प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। बताया गया कि सरकार की ओर से कुछ प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। इसके बाद आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर लगातार चर्चा जारी रही।
सामाजिक माध्यमों पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
जश्न वाले वीडियो सामने आने के बाद सामाजिक माध्यमों पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे युवाओं की जीत का प्रतीक बताया और कहा कि लंबे संघर्ष के बाद खुशी जाहिर करना स्वाभाविक है। वहीं कई अन्य लोगों ने इसे असंवेदनशील बताते हुए आलोचना की।आलोचकों का कहना है कि आंदोलन की शुरुआत विद्यार्थियों की समस्याओं और कथित परीक्षा अनियमितताओं के कारण हुई थी, इसलिए उत्सव मनाते समय उन परिवारों की पीड़ा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसी वजह से यह विषय लगातार चर्चा और विवाद का कारण बना हुआ है।
पार्टी प्रवक्ता ने दिया जवाब
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने वायरल वीडियो को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वीडियो में युवाओं का उत्साह और ऊर्जा दिखाई देती है। उनके अनुसार नई पीढ़ी अपनी बात रखने के लिए अलग-अलग माध्यमों का उपयोग करती है और यह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा है।उन्होंने कहा कि युवा सड़क पर बैठकर आंदोलन भी कर सकते हैं और अपनी सफलता का उत्सव भी मना सकते हैं। सौरव दास का कहना है कि युवाओं की अभिव्यक्ति के तरीकों को पुराने मानकों से नहीं परखा जाना चाहिए। हालांकि इस बयान के बाद भी सामाजिक माध्यमों पर बहस थमती हुई नहीं दिखाई दे रही है।