दिल्ली-एनसीआर दुष्कर्म मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्भया कांड का किया जिक्र

दिल्ली-एनसीआर में हाल के दिनों में सामने आई दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाओं से वर्ष 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक यादें ताजा हो गईं।

Sep 28, 2026 - 12:34
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दिल्ली-एनसीआर दुष्कर्म मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्भया कांड का किया जिक्र

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 सितंबर 2026

दिल्ली-एनसीआर में हाल के दिनों में सामने आई दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने घटनाओं के पीछे व्यवस्था और सुरक्षा में सामने आई कमियों पर भी गंभीर चिंता जताई।

निर्भया कांड का किया जिक्र

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में सामने आई हालिया घटनाओं ने वर्ष 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल घटना के बाद लोगों की एकजुटता पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा पर सवाल

न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला ने कहा कि पार्क, बस और अन्य सार्वजनिक स्थानों को खराब रोशनी, कमजोर निगरानी या जरूरी प्रशासनिक सुविधाओं की कमी के कारण खतरनाक जगहों में नहीं बदलने दिया जा सकता। अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।

ग्रेटर नोएडा की नाबालिग से जुड़ा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही एक नाबालिग लड़की के साथ चलती बस में हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले का भी उल्लेख किया। पुलिस के अनुसार, 4 अगस्त को 16 वर्षीय नाबालिग बारिश और अंधेरे के बीच परी चौक पर उतरी थी। इसके बाद वह एक स्लीपर बस में सवार हुई, जहां बस चालक और परिचालक ने कथित तौर पर उसके साथ यौन हिंसा की।

करीब 47 किलोमीटर तक चली बस

पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही और नाबालिग को दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया गया। बाद में पुलिस ने मामले में बस चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया। इस घटना के सामने आने के बाद सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।

बस की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

इस मामले में बस की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल सामने आए थे। जानकारी के अनुसार, संबंधित बस के खिलाफ 11 यातायात चालान दर्ज थे और उसमें लगा सीसीटीवी कैमरा भी काम नहीं कर रहा था। बताया गया कि बस कई पुलिस जांच बिंदुओं से होकर गुजरी, लेकिन उसे रोका नहीं गया। इन परिस्थितियों ने निगरानी और जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में भी सामूहिक दुष्कर्म का मामला

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सामने आए एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया। इसी महीने दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के एक पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ तीन लोगों द्वारा कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताया था। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई कदम उठाने के निर्देश दिए।

खराब रोशनी और बंद सीसीटीवी पर कार्रवाई

घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने ऐसे इलाकों की पहचान करने के निर्देश दिए जहां पर्याप्त रोशनी नहीं है, सीसीटीवी कैमरे बंद हैं या जगहें सुनसान रहती हैं। इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अब इन घटनाओं के साथ-साथ व्यवस्था में मौजूद कमियों पर भी विचार करने के लिए स्वतः संज्ञान लिया है।

अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा प्रमुख रहा। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसी घटनाओं को केवल अलग-अलग आपराधिक मामलों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन परिस्थितियों की भी जांच जरूरी है जिनसे अपराध के लिए असुरक्षित माहौल बना। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान संबंधित व्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।

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