ममता ने बागी नेताओं के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी सियासी संकट और गहरा गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने बागी नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि बागी गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का अनधिकृत इस्तेमाल कर रहा है तथा खुद को आधिकारिक नेतृत्व के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर बागी नेता खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताकर संगठन विस्तार में जुटे हैं।

ममता ने बागी नेताओं के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 29 जून 2026

तृणमूल कांग्रेस में बढ़ा अंदरूनी संघर्ष

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में चल रहा आंतरिक विवाद अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने अपने कुछ बागी नेताओं के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।पार्टी का आरोप है कि बागी नेता बिना किसी अधिकार के तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही वे खुद को पार्टी का वैध प्रतिनिधि बताने का प्रयास भी कर रहे हैं।


राज्यसभा सांसद ने दर्ज कराई शिकायत

तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सांसद डोला सेन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ नेताओं ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की अनुमति के बिना बैठकें आयोजित कीं और पार्टी के नाम पर गतिविधियां संचालित कीं।इसके अलावा उन पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, इलेक्ट्रॉनिक संदेश प्रसारित करने तथा संगठन से जुड़े अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं।पार्टी नेतृत्व का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली हैं।


बागी नेताओं ने बनाई नई राष्ट्रीय कार्यसमिति

राजनीतिक विवाद तब और बढ़ गया जब 22 जून को तृणमूल कांग्रेस के 64 बागी विधायकों ने एक अलग बैठक आयोजित की।इस बैठक में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक नई "राष्ट्रीय कार्यसमिति" के गठन की घोषणा की गई। बागी गुट ने वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को समिति का अध्यक्ष बनाया।दिलचस्प बात यह रही कि इस गुट ने ममता बनर्जी को मार्गदर्शक की भूमिका देने का प्रस्ताव रखा, जबकि पार्टी के दूसरे प्रमुख नेता अभिषेक बनर्जी को संगठन से निलंबित करने की घोषणा कर दी।


अभिषेक बनर्जी पर भी साधा निशाना

बागी गुट ने अपने फैसले में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए उन्हें संगठन से बाहर करने की बात कही।विश्लेषकों के अनुसार यह कदम तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संघर्ष को और गहरा करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि अभिषेक बनर्जी लंबे समय से पार्टी के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में शामिल रहे हैं।


कुणाल घोष का तीखा पलटवार

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने बागी गुट के कदमों की कड़ी आलोचना की है।उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेता पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का दुरुपयोग कर रहे हैं तथा ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।कुणाल घोष ने यह भी दावा किया कि कुछ बागी नेता बाहरी दबाव में काम कर रहे हैं और उनका उद्देश्य पार्टी को कमजोर करना है।


जनता असली नेतृत्व के साथ है: टीएमसी

पार्टी नेतृत्व का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा करती है और किसी भी समानांतर संगठन को स्वीकार नहीं करेगी।टीएमसी नेताओं ने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक आधिकारिक नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं तथा बागी गुट की कोशिशों को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा।


बागी गुट ने खुद को बताया असली टीएमसी

दूसरी ओर बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनकी ओर से गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति पूरी तरह पार्टी के संविधान के अनुरूप बनाई गई है।उन्होंने कहा कि विशेष बैठक की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज चुनाव आयोग को भेजे जाएंगे ताकि उनकी वैधता पर विचार किया जा सके।ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी कहा कि जल्द ही जिला स्तर की समितियां, राज्य इकाइयां और प्रवक्ताओं का नया पैनल गठित किया जाएगा।


ममता को दिया मुख्य सलाहकार बनने का प्रस्ताव

हालांकि बागी गुट ने ममता बनर्जी के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है।ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो उन्हें संगठन का मुख्य सलाहकार बनाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि उनका उद्देश्य पार्टी की मूल विचारधारा को आगे बढ़ाना है।


चुनाव आयोग तक पहुंचा विवाद

तृणमूल कांग्रेस का यह विवाद अब चुनाव आयोग तक भी पहुंच गया है।बागी गुट ने आयोग के समक्ष दावा किया है कि वही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं आधिकारिक टीएमसी नेतृत्व इस दावे का विरोध कर रहा है और कानूनी तथा राजनीतिक दोनों स्तरों पर जवाब देने की तैयारी कर रहा है।


आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है संघर्ष

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।यदि मामला चुनाव आयोग और अदालतों तक पहुंचता है तो पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया देखने को मिल सकती है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का यह आंतरिक संघर्ष चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।